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Bihar Teachers Leave Update: शिक्षकों की अर्जित छुट्टी पर नया नियम, जानें किसे होगा फायदा

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Bihar Teachers Leave Update

बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए छुट्टी लेने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब उन्हें ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से छुट्टी के लिए आवेदन करना होगा। मौखिक अनुरोध और कागज पर दिए गए आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था में छुट्टी की मंजूरी के लिए भी एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई है। विभाग का कहना है कि इस कदम से छुट्टी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी हाजिरी पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

इस नए नियम के तहत, शिक्षकों को अब केवल मौखिक सूचना या कागज पर आवेदन देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें नियमित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऑनलाइन आवेदन करना आवश्यक है। बिना उचित मंजूरी के छुट्टी पर जाने पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

नए नियमों के तहत शिक्षकों के लिए उपार्जित अवकाश (अर्न्ड लीव) से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की गई है। इन प्रावधानों के अनुसार, नए शिक्षकों को शुरुआत के तीन वर्षों के दौरान उपार्जित अवकाश प्राप्त नहीं होगा। इस दौरान, यदि शिक्षक 11 महीने कार्य करते हैं, तो उन्हें एक महीने की बिना वेतन छुट्टी प्राप्त हो सकेगी।

एक बार में अधिकतम दो महीने तक की छुट्टी लेने की अनुमति

इसके साथ ही, शिक्षकों को एक बार में अधिकतम दो महीने तक की छुट्टी लेने की अनुमति होगी। हालांकि, शिक्षकों को अलग-अलग प्रकार की छुट्टियों के लिए नियमों का पालन करना होगा, जिसे विभागीय दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है।

आकस्मिक और विशेष अवकाश की मंजूरी के लिए सोमवार को प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) उसी दिन निर्णय लेंगे, जिससे शिक्षकों को छुट्टी की स्वीकृति के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इसके विपरीत, मातृत्व अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश और चिकित्सा अवकाश की आवेदन प्रक्रिया अलग होगी, और इन आवेदनों को तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के पास भेजा जाना आवश्यक है।

निर्धारित समय सीमा में आवेदन DEO तक पहुंचेगा

नई व्यवस्था के अंतर्गत, आवेदन को आगे बढ़ाने की एक निश्चित समयसीमा तय की गई है। यदि संबंधित अधिकारी इस समय सारणी का पालन नहीं करते हैं, तो आवेदन स्वतः जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के पास चला जाएगा।

DEO को अधिकतम सात कार्य दिवसों में आवेदन पर निर्णय लेना आवश्यक होगा। इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य लंबित आवेदनों की समस्या को कम करना और अधिकारियों की उत्तरदायिता सुनिश्चित करना है।

अनुमति के बिना छुट्टी लेने पर वेतन रोक सकते हैं

बिहार सेवा संहिता के नियम-152 के अनुसार, छुट्टी को अधिकार नहीं माना जाता है। अर्थात्, अवकाश की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

यदि शिक्षक बिना स्वीकृति के अनुपस्थित रहते हैं, तो उनका वेतन रोका जा सकता है। इस स्थिति में सेवा में टूट माने जाने के लिए भी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए, शिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले आवेदन एवं अनुमोदन की स्थिति की जांच अवश्य करनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि छुट्टी की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होगी।

मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि निर्धारित समय सीमा का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य छुट्टी के आवेदनों का समय पर निपटारा करना और स्कूलों में उपस्थिति की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

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