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Bihar Holding Village Tax: अब गांवों में भी लगेगा होल्डिंग टैक्स, जानिए सरकार का नया नियम

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Bihar Holding Village Tax: बिहार के ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिहार कैबिनेट की बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस संदर्भ में ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई है। इसके परिणामस्वरूप अब गांवों में होल्डिंग टैक्स का भुगतान करना होगा। नए नियमों के लागू होने के बाद, भूमि, सिनेमाघरों, उद्योगों, हाट और होर्डिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर भी कर लगाया जा सकेगा।

मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-27 में ग्राम पंचायतों को विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क लगाने का प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन इस दिशा में कोई नियमावली नहीं बनाई गई थी। अब तक पंचायतों को इस प्रकार के अधिकार किसी राज्यादेश के माध्यम से नहीं दिए गए थे, लेकिन हाल ही में उन्हें कर लगाने के अधिकार प्रदान कर दिए गए हैं।

शुल्क पंचायत द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बदले भी लिए जा सकेंगे

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नई नियमावली के तहत ग्राम पंचायतें होल्डिंग टैक्स और पंचायत क्षेत्र में पेशे, व्यापार तथा उद्योग पर शुल्क लगाने की अनुमति प्राप्त करेंगी। इसके अतिरिक्त, पंचायतें भवनों पर होल्डिंग टैक्स, सिनेमाघरों, विज्ञापनों, होर्डिंग्स और हाट बाजारों से कर की वसूली कर सकती हैं। ये शुल्क पंचायत द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बदले भी लिए जा सकेंगे। पंचायतें सेवा शुल्क का निर्धारण भी कर सकेंगी, जिससे उनकी अपनी आय में वृद्धि होगी।

बिहार की कैबिनेट बैठक में पंचायत चुनावों से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसमें नए परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने की स्वीकृति दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय निकायों में संतुलित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था होगी और विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में बेहतर परिणाम मिल सकेगा।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पंचायत चुनावों का आधार 2011 की जनगणना होगा। इसी के अनुसार ग्राम पंचायतें, वार्ड, पंचायत समितियां और जिला परिषद क्षेत्रों का गठन और परिसीमन किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी, वहां नए क्षेत्रों का निर्माण किया जाएगा तथा पुराने क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। यह प्रक्रिया सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, साथ ही भौगोलिक और सामाजिक समानता पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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