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Bihar IGIMS Scam: आयुष्मान भारत योजना में फर्जी भर्ती और डिस्चार्ज से करोड़ों का घोटाला?
Bihar IGIMS Scam: बिहार के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। आरोप है कि अस्पताल में फर्जी भर्ती और गलत डिस्चार्ज के माध्यम से करोड़ों रुपये के गबन का प्रयास किया गया। इस मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया है।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि IGIMS में सॉफ्टवेयर का उपयोग करके फर्जी क्लेम पास किए जाने की संभावना है, जिससे भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IGIMS प्रशासन को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित किया जा रहा था
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पूरा खेल हॉस्पिटल इनफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इस सॉफ्टवेयर का प्रबंधन आउटसोर्सिंग कंपनी मेहता डाटा मैट्रिक्स के हाथों में था। मामले में कंपनी के चार कर्मचारियों, जिनमें अमरजीत राज, चंदन और अभिषेक शामिल हैं, पर आरोप लगाए गए हैं।
जांच प्रक्रिया में यह भी उजागर हुआ है कि आयुष्मान कार्ड को सॉफ्टवेयर में धोखाधड़ी से अपलोड कर क्लेम पास कराए गए।
तकनीकी जांच में कई संदिग्ध लेनदेन
मामले के सामने आने के बाद, मेहता डाटा मैट्रिक्स ने 45 लाख रुपये लौटाने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद, संकेत मिल रहे हैं कि घोटाले की जड़ें और भी गहरी हो सकती हैं।
सचिवालय के एसडीपीओ-2, साकेत कुमार ने जानकारी दी है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों पर मरीजों से गैरकानूनी वसूली के आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच में कई संदिग्ध लेनदेन और फर्जी दावों का खुलासा हुआ है। स्रोतों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) जल्द ही इस जांच का जिम्मा उठा सकती है।
घोटाले के उजागर होने के बाद IGIMS प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी लंबे समय से कैसे चलती रही और इसमें शामिल व्यक्तियों की क्या भूमिका थी।
