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डॉ योगेन्द्र का तंज: “हिन्दू- हवा बहने और हिन्दू- आग जलने का वक्त”, विकास और हिंदुत्व पर बड़ा हमला

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भारत बहुत विकसित हो चुका है। पिछले बारह साल से भारत क्या झख मार रहा है? धड़ाधड़ वह विकास में ही लगा है। उसने शपथ ले ली है कि विकास को छोड़कर कुछ नहीं करेंगे।

पेट्रोल- डीज़ल के दाम उछाल मार रहे हैं। मनमोहन सिंह सरकार के समय 71 रुपए पेट्रोल था और 55 रुपए डीज़ल। अब 110 रुपए पेट्रोल है और 96 रुपए डीज़ल। पेट्रोल और डीज़ल ने विकास किया है।

विकास का ही नतीजा है कि मनमोहन सिंह के समय बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, अक्षय कुमार पेट्रोल- डीज़ल कम होने के कारण अभूतपूर्व पीड़ा में थे, अब दाम बढ़ जाने से सुख की नींद ले रहे हैं।

पेट्रोल और डीज़ल के विकास को देख कर रोने लगा

बेचारा रूपया, पेट्रोल और डीज़ल के विकास को देख कर रोने लगा था। प्रधानमंत्री ने रुपए को समझाया- “रोओ मत। तुम्हारा भी समय आयेगा। तुम राष्ट्रीय नहीं, अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में नाम कमाओगे।”

हर बुरे आदमी का भी दिन आता है। रूपए का भी आ गया। मनमोहन सिंह के समय एक डॉलर का 60 रुपए का भुगतान करना पड़ता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी मेहनत की। पिछले बारह वर्षों में ठीक से सोया नहीं बेचारा। 18-18 घंटे तक काम किया।

उन्हें इस देश ने बँधुआ मज़दूर बना दिया है। बुढ़ापे में कोई इतना काम लेता है भला! इसके लिए तो जस्टिस सूर्यकांत के कोर्ट में मुक़दमा चलना चाहिए। जिन्हें वृद्धाश्रम में आराम करना चाहिए था, उनसे हर दिन 18 घंटा काम लेते हैं। प्रधानमंत्री का भला मानिए कि उन्होंने अब तक भारत पर कोई मुक़दमा दायर नहीं किया।

पदों पर हिन्दू के रहते हिन्दू ही खतरे में आ गया

वे लगातार मेहनत कर मनमोहन सिंह के रूपये को 96 तक पहुँचा दिया है। अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में एक डॉलर के बदले 96 रुपये का भुगतान करना है।

उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि सभी पदों पर हिन्दू के रहते हिन्दू ही खतरे में आ गया है। यह हिंदुत्व का विकास है। सावरकर, गोडसे और गोलवलकर स्वर्ग में सोने की ढोलक पर थाप दे रहे हैं। हिंदुत्व कहाँ से कहाँ पहुँच गया! पहले खतरा कम था। अब खतरे में बढ़ोतरी हो गई है। हर गली- मुहल्ले में हिंदुत्व खतरे में आ गया है। नरेंद्र मोदी जी की कड़ी मेहनत का ही प्रसाद है कि हर तरफ खतरा बढ़ गया है।

आप जरा और ठहरिए। देश विकास के शिखर पर होगा। हिन्दुओं के लिए अलग मार्केट होगा। हिन्दुओं का अपना चावल, दाल, सब्ज़ी आदि की दुकान होगी। उस मार्केट में सिर्फ़ हिन्दू- हवा बहेगी और हिन्दू- आग जलेगी।

ओबीसी के कंधे पर भगवा लाद दिया गया है

संभव है कि विकास आपके सामने नये रूप में भी होगा। ब्राह्मण के लिए अलग मार्केट बनेगा। राजपूत, भूमिहार का अलग। ओबीसी और दलितों के लिए भी अलग- अलग। किसी को धर्म भ्रष्ट करने की इजाज़त नहीं होगी।

संविधान पाकर जो दलित- ओबीसी उछल कूद करते रहते हैं, उनके कंधे पर भगवा लाद ही दिया है। अब हाथ में मनुस्मृति थमाना है। उन्हें लगे कि स्वतंत्रता सेनानी सावरकर, गोडसे, गोलवलकर आदि थे। गांधी, पटेल, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ाँ आदि देशद्रोही थे। गोडसे शहीद थे, गांधी गद्दार।

देश का चतुर्दिक विकास होना चाहिए। वस्तु का ही नहीं, विचार का विकास भी आवश्यक है। पिछले कुछ वर्षों में नरेंद्र मोदी और उसके गिरोह ने विचारों का अभूतपूर्व विकास किया है। ऐसा विकास किया है कि जिसे वह पीट रहा है, वह भी उसके चरण- चुंबन कर रहा है।

पाताल से धरती खोद कर अच्छे दिन आया

पहले देश में कितने गदहे लोग थे जो सत्य को सत्य और असत्य को असत्य मानते थे। आजकल के विचारवान लोग सत्य को निकृष्ट और असत्य में संभावनाएं ढूंढ रहे हैं।

उसने आते हुए कहा था कि अच्छे दिन लायेंगे। उसके कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि उसने पाताल से धरती खोद कर अच्छे दिन ले आया है। गंगा माँ ने जिसे बुलाया था, उससे माँ तृप्त हो गई है। गंगा माँ ने भी इतना विकास किया है कि वह हर क्षण खतरे में ही रहती है।

कुल मिलाकर यह कि इस विकास में खतरे का बहुत विकास हुआ है। जो भी हो, हुआ तो विकास ही। वह चाहे खतरे का ही, क्यों न हो!

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