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Gurgaon Labour Protest: दमन के खिलाफ प्रदर्शन, 350 से अधिक मजदूरों की गिरफ्तारी पर उठा सवाल

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Gurgaon Labour Protest: देशभर में जारी मजदूर आंदोलनों और उन पर हो रहे कथित पुलिसिया दमन के खिलाफ आज लघु सचिवालय, गुड़गांव में एक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर हुआ, जिसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मजदूर संगठनों, छात्र-युवा समूहों और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

मजदूरों की गिरफ्तारी पर विरोध

प्रदर्शनकारियों ने गुड़गांव–मानेसर और नोएडा सहित देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे मजदूर आंदोलनों पर कथित दमन की कड़ी आलोचना की।
वक्ताओं के अनुसार, मानेसर में मॉडेलमा और रिचा ग्लोबल के 56 से अधिक मजदूरों — जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं — को गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा, Noida से करीब 350 मजदूरों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की बात कही गई, जिन पर हत्या के प्रयास, आगजनी और दंगा जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

प्रदर्शन के दौरान निम्न मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं:

  • सभी गिरफ्तार मजदूरों की तत्काल रिहाई
  • कथित फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए
  • पुलिसिया दमन पर रोक लगे
  • हाल की घटनाओं की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो

श्रम नीतियों पर उठे सवाल

सभा को संबोधित करते हुए इंकलाबी मजदूर केंद्र के मुन्ना प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नई श्रम नीतियों के कारण मजदूरों से लंबे समय तक काम कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 12-12 घंटे काम करवाने जैसी स्थितियों के खिलाफ मजदूरों का आक्रोश स्वाभाविक है और इसे दबाने की कोशिश की जा रही है।

न्यूनतम वेतन और अधिकारों की मांग

वक्ताओं ने बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताते हुए ₹30,000 न्यूनतम वेतन की मांग उठाई।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि:

  • 8 घंटे का कार्यदिवस सुनिश्चित किया जाए
  • ओवरटाइम का उचित भुगतान हो
  • साप्ताहिक अवकाश और सुरक्षित कार्य स्थितियां लागू हों

ट्रेड यूनियन नेताओं पर कार्रवाई का मुद्दा

प्रदर्शन में यह भी आरोप लगाया गया कि देशभर में ट्रेड यूनियन नेताओं, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई बढ़ रही है।

वक्ताओं के अनुसार, विभिन्न राज्यों में:

  • नेताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं
  • कई को नजरबंद किया गया है
  • कुछ को जेल भी भेजा गया है

इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया गया।

बाहरी तत्व” आरोप पर सवाल

सभा में यह भी कहा गया कि मजदूर आंदोलनों को “बाहरी तत्वों” से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि ये आंदोलन मजदूरों की बुनियादी मांगों को लेकर चल रहे हैं।

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