Sen your news articles to publish at [email protected]
Nana Patekar Passes Away: सिनेमा जगत में अपने खूबसूरत संवादों और अदाकारी से लाखों दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे।
गुरुवार सुबह उन्होंने 75 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। आरा से उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं।
कोरोना महामारी के दौरान वह कोईलवर आए थे और वहां उन्होंने पर्यावरण और हरियाली के महत्व को समझाया। कोईलवर के केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के कमांड मुख्यालय परिसर में उन्होंने जिन आम और आंवले के पौधों को रोपा था, वे आज बड़े पेड़ का रूप ले चुके हैं। ये पेड़ नाना की उस सोच और भावना के प्रतीक हैं, जिसमें प्रकृति और मानवता दोनों के प्रति गहरा प्रेम दर्शाया गया है।
28 जून 2020 को, नाना पाटेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 47वीं वाहिनी के मुख्यालय में पहुंचे। उस कठिन समय में, उन्होंने वहां मौजूद जवानों और किसानों का हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने आम और आंवले के पौधे रोपे और पौधारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पेड़-पौधे जीवन का अनिवार्य हिस्सा होते हैं। उनका संदेश स्पष्ट था: अगर प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उस समय नाना ने किसानों और जवानों की सराहना करते हुए उन्हें देश का बड़ा हितैषी बताया।
इसके अलावा, कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए उन्होंने लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने की अपील की।
जवानों को दिया उत्साह
सीआरपीएफ कैंप में जाकर उन्होंने जवानों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। नाना पाटेकर के कोईलवर आगमन पर बिहार सेक्टर के उस समय के आईजी, डीआईजी तथा 47वीं वाहिनी के कमांडेंट भूपेश यादव ने उन्हें शॉल और बुके देकर सम्मानित किया।
सुशांत की याद में भावनाएं हुईं व्यक्त
कोईलवर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुशांत एक बहुत प्यारा लड़का था और उसकी अनुपस्थिति ने उन्हें गहरा दुख दिया है।
नाना ने सुशांत को अपने बेटे के समान माना। इस वरिष्ठ कलाकार की बातों में अपने युवा साथी के प्रति एक गहरा स्नेह और अपनापन नजर आया।
नाना ने अपनी प्रसिद्ध फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के संवाद भी जवानों के बीच साझा किए, जो कि उनमें जोश भरने का कार्य किया।
उनके द्वारा कहे गए संवाद — “ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा…” ने सामाजिक एकता का संदेश फैलाया।
इसके अतिरिक्त, “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…” और “सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान…” जैसे संवाद उनकी पहचान के साथ-साथ दर्शकों के दिलों में भी बस चुके हैं।
ताड़ी पीने की इच्छा प्रकट की
कोईलवर के रमेश सिंह ने बातचीत में बिहार की मिट्टी और यहां की देसी परंपराओं के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की।
बिहार में प्रचलित ताड़ी और नीरा के बारे में बात करते हुए, उन्होंने इसे पीने की इच्छा जताई। उनकी यह सरल और स्पष्ट टिप्पणी वहां उपस्थित लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई।
