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NCAER Bihar Liquor Ban: शराबबंदी पर NCAER की सलाह से बिहार में बवाल, लीगल नोटिस भेजकर मांगा जवाब
NCAER Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी को समाप्त करने और शराब की बिक्री को पुनः आरंभ करने से संबंधित एक रिपोर्ट के चलते राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (JDU), ने इस रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इसके परिणामस्वरूप, रिपोर्ट जारी करने वाली एजेंसी, राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER), को कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ है। पटना हाईकोर्ट के वकील आनंद कुमार तिवारी ने NCAER के डायरेक्टर जनरल, गवर्निंग बॉडी और चार लेखकों को यह नोटिस भेजा है, जिसमें उनसे सात दिनों के भीतर जवाब देने का अनुरोध किया गया है।
कुछ दिन पहले, NCAER ने एक शोध पत्र जारी किया जिसमें यह सुझाव दिया गया कि बिहार में शराबबंदी को हटाना चाहिए। इस रिपोर्ट में इस बात का हवाला दिया गया कि शराबबंदी लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में कोई कमी नहीं आई है, और नशीली दवाओं तथा अवैध शराब का प्रवृत्ति बढ़ी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि शराब की बिक्री पुनः शुरू की जाती है, तो बिहार सरकार को राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलेगी।
NCAER की रिपोर्ट पर ऐतराज
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने NCAER की रिपोर्ट पर ऐतराज जताया है। पार्टी के प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा था कि वे इस संस्था को कानूनी नोटिस जारी करेंगे। इसके तुरंत बाद वकील आनंद कुमार तिवारी ने संबंधित एजेंसी को लीगल नोटिस भेज दिया है।
इसके अलावा, NCAER की प्रारंभिक रिसर्च के चार लेखकों को भी नोटिस भेजा गया है। इसमें डॉ. रत्ना सहाय, प्रोफेसर संतोष गौतम, प्रोफेसर निशीथ प्रकाश, और डॉ. आकाश देव शामिल हैं। इस नोटिस में NCAER के डायरेक्टर जनरल-गवर्निंग बॉडी के साथ-साथ सभी लेखकों से 7 दिनों के अंदर तथ्यात्मक, स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर देने की मांग की गई है।
नोटिस में बताया गया है कि इंडिया पॉलिसी फोरम की प्रक्रिया के अनुसार, किसी पेपर को अंतिम रूप देने से पहले चर्चा होती है, जिसमें विशेषज्ञों की टिप्पणियां शामिल होती हैं, और संपादकीय स्तर पर आवश्यक संशोधन किए जाते हैं। ऐसे में प्रारंभिक स्तर के इस पेपर को राष्ट्रीय मीडिया में व्यापक रूप से फैलाने से पहले, इसके तथ्यों और निष्कर्षों की सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में क्या स्तर पर जांच की गई?
बिहार में शराबबंदी कानून भविष्य में भी लागू
यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब NCAER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपनी वेबसाइट पर कोई शोध पत्र सार्वजनिक करते हैं और उसके निष्कर्षों को राष्ट्रीय स्तर पर अपने अध्ययन या रिपोर्ट के रूप में पेश करते हैं, तो संस्थान की जिम्मेदारी बनती है कि वह बताएं कि इन तथ्यों, आंकड़ों और निष्कर्षों की पुष्टि किस आधार पर की गई है।
बीते 10 वर्षों से राज्य में शराब की बिक्री, सेवन और उत्पादन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। 2016 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने शराबबंदी कानून को लागू किया था, जिसे सभी पक्षों ने समर्थन दिया था। समय-समय पर इस कानून में कुछ संशोधन भी किए गए हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने NCAER के शोध पत्र के हवाले से यह स्पष्ट किया है कि बिहार में शराबबंदी कानून भविष्य में भी लागू रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
