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NCRB Report Bihar Cyber Crime: सिस्टम बेबस, बिहार के 99.8 फीसदी केस पेंडिंग; NCRB से खुली पोल
NCRB Report Bihar Cyber Crime: बिहार में साइबर अपराधियों के हौसले काफी बढ़ गए हैं, जबकि पुलिस की जांच और कानूनी कार्यवाही की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में साइबर अपराध के मामलों में लगभग डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 4450 मामलों की तुलना में 2024 में 6380 नए मामले सामने आए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लंबित पड़े 11,764 मामलों में से पुलिस केवल 12 मामलों का ही निपटारा कर सकी है। इनमें से भी केवल 8 अपराधियों को सजा मिली है, जो यह दर्शाता है कि साइबर ठगों के खिलाफ प्रणाली कितनी कमजोर है।
पुलिस साइबर ठगी के मामलों की जांच में पीछे
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार पुलिस साइबर ठगी के मामलों की जांच में पीछे रह गई है। उपलब्ध 11,764 मामलों में से लगभग 87 प्रतिशत जांच पूरी नहीं हो पाई है। पुलिस ने केवल 917 मामलों में चार्जशीट दायर की है, जबकि 524 मामलों को सबूतों के अभाव में बंद कर दिया गया है। इस समय 10,283 मामले पुलिस फाइलों में ही अटके हुए हैं, जिससे अपराधियों में कानून का डर कम होता जा रहा है।
बिहार में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के पैटर्न दिखाई दे रहे हैं।
ठगी के बढ़ते अपराध
- रिपोर्ट में सामने आया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ने वाले मामलों की संख्या सबसे अधिक 3771 है।
- महिलाओं के खिलाफ 864 साइबर अपराधों की धाराएं दर्ज की गई हैं, जिनमें ब्लैकमेलिंग के 40, छेड़खानी के 73 और फेक प्रोफाइल से संबंधित 70 मामले शामिल हैं।
- इसके अलावा, आपसी दुश्मनी के 1167 मामले, फिरौती के 187 मामले और यौन शोषण के 96 घटनाएं भी देखने को मिली हैं।
- इस वर्ष पुलिस ने कुल 1333 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन सजा का प्रतिशत बेहद कम है।
5,782 मामले अदालती प्रक्रिया के लिए लंबित
बिहार में साइबर अपराध से जुड़े 5,782 मामले अदालती प्रक्रिया के लिए लंबित हैं। अगर देश के आँकड़ों पर नजर डालें, तो यह संख्या लगभग 98 हजार तक पहुँचती है, जो ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पुलिस ने मात्र 917 नए मामलों को ट्रायल के लिए भेजा, जबकि 4,865 मामले पिछले वर्ष 2023 से ही लंबित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर साइबर केसों का निपटारा दर केवल 9 प्रतिशत के आस-पास है, जिसमें तेलंगाना (637 सजा) शीर्ष पर है।
