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Patna Air Quality Survey 2026 में 29वें से 14वें स्थान पर पहुंचा, दिल्ली से बेहतर स्थिति के बावजूद सतर्क रहने की जरूर

patna air quality survey 2026
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लेखक- वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, जेपी सेनानी

Patna Air Quality Survey 2026: पटना शहर 2023 के 29वें रैंक से उठकर 2024 में 14वें स्थान पर आया। आप गौर कर सकते हैं, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को बीमारू प्रदेश कहते रहे हैं। परंतु शहरों में हवा के क्वालिटी संबंधी सर्वेक्षण से पता चला कि इन प्रदेशों के शहर बेहतर कर रहे हैं।

यह सही समय है कि नागरिक गली-कूचे के सफाई तंत्र पर ध्यान दें। नगर प्रशासक अगर चुस्त हों और पैसे खर्च कर रहे हों, तो अभी इसे गली-कूचे तक निगरानी नहीं हो पाएगी।

हवा की क्वालिटी के लिए सड़क और सड़क के किनारे पैदल चलने वालों के लिए व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। ज्यादातर मोहल्लों की सड़क बहुत ही खराब क्वालिटी की ढलाई से बने सीमेंट की सड़क हैं। इन सड़कों के रहते हुए आपको पहाड़ों में ट्रैकिंग ग्राउंड पर जाकर अभ्यास करने की जरूरत नहीं है। हालांकि यह ट्रैकिंग ग्राउंड का विकल्प नहीं बन सकते, क्योंकि मोहल्ले की सड़कें ज्यादातर बहुत ही भीड़भाड़ वाली और गलीज, गंदी और संकरी होती हैं।

पटना के एयर पॉल्यूशन की स्थिति में सुधार को देखते हुए तालियां बजाने की जगह जागरूक होने की आवश्यकता है।

हमेशा ही ध्यान रखिए। किसकी सूचना अपने इलाके के इंचार्ज इंस्पेक्टर, सफाई अधिकारी, के साथ-साथ अपने जोन के निगम कार्यालय के फोन नंबर पर व्हाट्सऐप द्वारा जरूर भेजें।

बिहार के नगर पालिकाओं के प्रमुख अधिकारी यशपाल मीणा ने बताया है कि राष्ट्रीय वायु शुद्धता दिवस पर अभी से जाड़े के दिनों के एयर क्वालिटी पर ध्यान रखा जाए।

लखनऊ शहर का विस्तार पटना के मुकाबले बहुत तेज

लखनऊ शहर में शुरू से ही गली-कूचे से कूड़ा-कचरा के उठाव की व्यवस्था बना रखी थी। लखनऊ शहर का विस्तार पटना के मुकाबले बहुत तेज है। पटना के विकास में यह ध्यान नहीं रखा जाता कि नए इलाके सड़कों और नालियों के साथ बसें।

लखनऊ से सबक लेना है तो एक जमाने पहले से गलियों में भी कूड़े के उठाव की बेहतर व्यवस्था वहां चल रही है। लखनऊ ने 200 में से 198 अंक प्राप्त किया और ठीक उसके साथ रहते हुए इंदौर ने 197 अंक प्राप्त किया, जबलपुर में 195 अंक प्राप्त किया।

पटना ने 178 अंक प्राप्त करके 16वें स्थान पर पहुंचाया। यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि रांची को पटना के मुकाबले सफाई में बेहतर माना जाता रहा है। परंतु ताजा सर्वेक्षण के अनुसार रांची शहर ने 162 अंक प्राप्त करके 27वां स्टेटस बनाया।

यह सब 10 लाख आबादी या इससे अधिक आबादी वाले शहरों के सर्वेक्षण का नतीजा है।

पटना शहर के किनारे गंगा नदी का विस्तार है। और इस शहर पर ईंधन वाली गाड़ियों का दबाव महानगर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु आदि से कम है।

पटना के हवा की गुणवत्ता बेहतर रखने के संदर्भ में एक और बात है। पटना शहर में पाइपलाइन वॉटर से पानी की सप्लाई पहले बहुत बेहतर रही थी। शहर के विस्तार के साथ पाइपलाइन का विस्तार नहीं हुआ है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि दिल्ली की झोपड़पट्टी और मुंबई के बड़े-बड़े झोपड़पट्टियों का दबाव है। पटना में झोपड़पट्टियों का दबाव महानगरों के मुकाबले कम है।

रैंक का निर्धारण 37 तरह के स्केल या मानक को आधार बनाकर किया

शहरों के रैंक का निर्धारण 37 तरह के स्केल या मानक को आधार बनाकर किया जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोमवार को वायु सर्वेक्षण 2026 के परिणामों की घोषणा कर दी है।

पटना के मोहल्ले में यह सर्वेक्षण किया जाए कि कौन से स्थान पर कूड़ा गिरने और डंपिंग की वजह से हवा की क्वालिटी बहुत खराब रहती है।

पटना में मुख्य सड़कों की बनावट भी ऐसी रही है कि ट्रैफिक के समय काफी धूल उड़ाता है। मुख्य सड़कों पर पानी के छिड़काव के द्वारा धूल नियंत्रित करने की कोशिश पर असर डाला है। हमने अपने रैंक में सुधार किया है। इससे सबक लेकर कमजोर पॉइंट पर ध्यान देना चाहिए।

शहर में कूड़ा डंपिंग के सभी केंद्रों को खत्म करने का जो अभियान था, उसे जारी रहना चाहिए।

हमें यह संतोष नहीं करना चाहिए कि पटना हवा के क्वालिटी के मामले में दिल्ली से बेहतर स्थिति में आ गया है।

ट्रैफिक चौक, गलियां, सड़कों से निकास के जगह पर दोनों तरफ की भीड़ की वजह से बॉटल नेक, ट्रैफिक चौराहों पर चारों तरफ आइलैंड का निर्माण करके ट्रैफिक की गति को सुधारा जा सकता है। ट्रैफिक जाम की वजह से एयर पॉल्यूशन की क्वालिटी खराब से खराब हो रही है।

वार्ड नंबर 43 ने पूरे बिहार के स्तर पर पहला स्थान हासिल

मध्य प्रदेश में दो शहर इंदौर और जबलपुर दूसरे और तीसरे स्थान पर आए हैं।

लखनऊ को डेढ़ करोड़ रुपया, इंदौर को एक करोड़ रुपया और जबलपुर को 50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी गई है।

चौथा रैंक भी मध्य प्रदेश के भोपाल शहर ने प्राप्त किया है और पांचवां रैंक गुजरात के सूरत ने प्राप्त किया है।

बिहार में पटना ने अपना रैंक सुधार किया है, परंतु मुजफ्फरपुर 28वें रैंक पर और गया जी 35वें रैंक पर है।

पटना नगर निगम के अलग-अलग वार्ड की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई है।

वार्ड नंबर 43 ने पूरे बिहार के स्तर पर पहला स्थान हासिल करके राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा में 25 लाख रुपए का पुरस्कार पाया। वार्ड नंबर 9 को 15 लाख रुपए का पुरस्कार इसलिए दिया गया है क्योंकि इसने देश के सबसे ऊपर के 9 वार्ड में अपनी जगह बनाई है।

इस समस्या पर आप अपने सुझाव के साथ लिखने और शेयर करने की कोशिश कीजिए। यानी आप परिस्थितियों को केवल आलोचना की नजर से देखते रहे हैं और कोसते रहे हैं। अभी यहां लिखकर आप कैंपेन को आगे बढ़ाइए।

पटना की एयर क्वालिटी में सुधार एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि मानकर संतुष्ट होने की जगह शहर के कमजोर पॉइंट्स पर ध्यान देना जरूरी है। गली-कूचे की सफाई, कूड़ा डंपिंग, सड़क की धूल, ट्रैफिक जाम और पैदल चलने वालों की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार निगरानी और नागरिक भागीदारी ही इस सुधार को आगे ले जा सकती है।

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