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Patna Zoo और Dairy Institute से हटा ‘संजय गांधी’ का नाम, Bihar Congress की विरासत पर कैंची!

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बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से ‘संजय गांधी’ नाम को हटा दिया है। अब पटना जू (Patna Zoo) को ‘संजय गांधी जैविक उद्यान’ नहीं कहा जाएगा। यह परिवर्तन कांग्रेस नेता संजय गांधी के नाम को पटना के प्रसिद्ध चिड़ियाघर और डेयरी टेक्नोलॉजी संस्थान (Dairy Institute) की पट्टिकाओं से हटा देता है। सरकार का कहना है कि इन संस्थानों की पहचान अब उनके स्थान और राज्य के नाम के जरिए होगी। यह निर्णय न केवल एक प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि इसे राज्य की राजनीतिक दिशा में एक बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

आधिकारिक तौर पर ‘पटना जू’ के नाम से जाना जाएगा

पटना का एक प्रमुख पर्यटन स्थल, जिसे पहले ‘संजय गांधी जैविक उद्यान’ के नाम से जाना जाता था, अब आधिकारिक तौर पर ‘पटना जू’ के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग इसे पहले से ही इसी नाम से जानते थे, लेकिन अब सरकारी दस्तावेजों में भी इसका नया नाम शामिल हो गया है। इसके अलावा, इस संस्थान का संचालन करने वाली समिति का नाम अब ‘पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी’ रख दिया गया है।

इन संस्थानों का इतिहास कई दशकों से

इन संस्थानों का इतिहास कई दशकों से है। चिड़ियाघर की स्थापना 1969 में हुई, जब उस समय के राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की भूमि दान की। यह चिड़ियाघर 1973 में आम जनता के लिए खोला गया। राजभवन ने 34 एकड़ भूमि दान में दी थी। इसके बाद, 1972 में बिहार सरकार ने लगभग 120 एकड़ अतिरिक्त भूमि जोड़कर इसे एक जैविक उद्यान और बोटैनिकल पार्क के रूप में विकसित किया। आज यह देश का चौथा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है, जहां 110 प्रजातियों के करीब 800 जीव निवास करते हैं, जिनमें बाघ, शेर, गेंडे, हिरण, सांप आदि शामिल हैं। इस उद्यान में लगभग 300 प्रकार के पेड़-पौधे भी हैं।

कांग्रेस के जमाने के संस्थानों का बदला नाम

संस्थान का पुराना नामनया आधिकारिक नाम
संजय गांधी जैविक उद्यानपटना जू (Patna Zoo)
संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन समितिपटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी
संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजीबिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी

डेयरी संस्थान को मिला नया नाम

बिहार पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी अब ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना’ के नाम से जाना जाएगा। यह संस्थान राज्य में डेयरी शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ छात्रों को डेयरी से संबंधित विभिन्न व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाती है। इसमें डेयरी टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग, दूध प्रसंस्करण की उन्नत तकनीक, डेयरी केमिस्ट्री और माइक्रोबायलॉजी, गुणवत्ता और सुरक्षा की परख, डेयरी व्यवसाय प्रबंधन, और अन्य कारोबारी कौशल सीखने के अवसर शामिल हैं।

1980 में संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना हुई

बिहार में जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, तब 1980 में संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना हुई। यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त है। इस डेयरी संस्थान का पहला बैच 1982 में पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय से आया था। इसके बाद, 1986 में इसे पटना स्थानांतरित किया गया। 1999 में, यह संस्थान अपने वर्तमान परिसर में शिफ्ट हुआ। कुछ समय के लिए, इसे बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) के साथ भी जोड़ा गया था। अंत में, कई विकास के चरणों के बाद, 2016 में इसे बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया।

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