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डॉ योगेन्द्र

Youth Protest Indian Politics: सड़कों की हलचल क्या नया गुल खिलाएगी? युवाओं के उभार और बदलती राजनीति…

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों युवाओं की बढ़ती सक्रियता और सड़कों पर दिखाई दे रही हलचल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामाजिक चिंतक

हवा के नये झोंके से कुछ सवाल | डॉ योगेन्द्र

हवा के नये झोंके से कुछ सवाल रांची में हूँ और वह भी कांके के इलाक़े में। गाँव में था तो कांके का नाम सुनता था। जब कोई अतिरिक्त बड़बड़ाता

इन दिनों: उन्हें देश उजाड़ने का हुनर प्राप्त है | डॉ योगेन्द्र का सत्ता, शिक्षा और मीडिया पर तीखा…

कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में बरसों से बसी पुस्तकों की बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी हो रही है। सत्ता को पुस्तकें रास नहीं आती, क्योंकि

इन दिनों: हम वो इंकलाब हैं, जुल्म का जवाब हैं | डॉ योगेन्द्र

सड़क किनारे कौन लोग हैं जो ठेला लगाते हैं, टीन के पटरे से घर बनाकर रहते हैं, परिवार पालने के छोटे- छोटे सपने देखते हैं? क्या वे इसी देश

इन दिनों: सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है | डॉ योगेन्द्र

कई बार धोखा हो जाता है । आप परिस्थिति को समझ नहीं पाते और आकलन में कमी रह जाती है। अगर संबंध में भावनाओं का जोश हो तो जोखिम और बढ़ जाती है।

इन दिनों: रक्त वर्षों से नसों में खौलता है | डॉ योगेन्द्र

आजकल के नेता जितने मुँहफट हैं, उतने तो गाँव के लंपट भी नहीं होते। लगता है कि बदज़ुबानी उनके ख़ून में बस गया है । भोजपुरी फ़िल्मों में

फर्जीस्तान के बाशिंदों से निवेदन — डॉ योगेन्द्र

घाम-पसीना छर्र-छर्र बहता है। हवा बहती है, तब भी पसीना नहीं रुकता। गर्मी का मौसम है तो स्वाभाविक है। मध्यम वर्ग को थोड़ी-सी गर्मी परेशान कर

इन दिनों: आइए, नाख़ून कटा कर शहीद बनें — डॉ योगेन्द्र

इन दिनों: आइए, नाख़ून कटा कर शहीद बनें — डॉ योगेन्द्र लिखते है - नाख़ून कटा कर शहीद कहलाने का सुख अविस्मरणीय है। अगर आप सत्ता में हैं तो यह

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है | डॉ योगेन्द्र

बारिश, खेत और पिता की याद रात में आकाश बरसता रहा । सुबह सूरज भरखर रोशनी लेकर आया। जहाँ पर हूँ, सामने खेत ही खेत है। नीम - आम के वृक्ष और