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डॉ योगेन्द्र

फर्जीस्तान के बाशिंदों से निवेदन — डॉ योगेन्द्र

घाम-पसीना छर्र-छर्र बहता है। हवा बहती है, तब भी पसीना नहीं रुकता। गर्मी का मौसम है तो स्वाभाविक है। मध्यम वर्ग को थोड़ी-सी गर्मी परेशान कर

इन दिनों: आइए, नाख़ून कटा कर शहीद बनें — डॉ योगेन्द्र

इन दिनों: आइए, नाख़ून कटा कर शहीद बनें — डॉ योगेन्द्र लिखते है - नाख़ून कटा कर शहीद कहलाने का सुख अविस्मरणीय है। अगर आप सत्ता में हैं तो यह

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है | डॉ योगेन्द्र

बारिश, खेत और पिता की याद रात में आकाश बरसता रहा । सुबह सूरज भरखर रोशनी लेकर आया। जहाँ पर हूँ, सामने खेत ही खेत है। नीम - आम के वृक्ष और