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वास्तव में कॉकरोच वे हैं जो नौजवानों को कॉकरोच कह रहे हैं |डॉ योगेन्द्र

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बिहार में वेतन-पेंशन संकट

बिहार में छह महीने से वृद्धा पेंशन, विश्वविद्यालयों में चार महीने से पेंशन और तीन महीने से वेतन नहीं मिला है । चुनाव जीतना था तो धुंआधार टैक्स और क़र्ज़ के पैसे लुटाये गए । क़र्ज़े में हर राज्य डूबा है और सरकार पूँजीपतियों के सामने निरीह बना बैठा है । वास्तव में कॉकरोच वे हैं जो नौजवानों को कॉकरोच कह रहे हैं

आबादी और विकास की अनदेखी

दरअसल हमने आबादी के अनुसार विकास के बारे में नहीं सोचा। आज भी नहीं सोच रहे हैं । जो लोग आबादी बढ़ाने के बारे में कह रहे हैं, वे नहीं जानते कि भारतीय जनता की बुनियादी सुविधाएं भी पूरी नहीं हो रही। करोड़ों करोड़ युवा बेरोजगार हैं ।

मुख्य न्यायाधीश का विवादित बयान

उन्हें माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कॉकरोच (तिलचट्टे) की उपाधि दी है । यह भी सच है कि अगर रोज़गार बढ़ाने के बजाय घटाते गये तो यह कॉकरोच सिस्टम्स को चाट जायेगा ।

मुझे फ्रांत्स काफ़्का की कहानी कॉकरोच की याद आ रही है । उसका नायक सचमुच कॉकरोच में तब्दील हो जाता है और परिवार के लोगों की नफ़रत और उपेक्षा से वह दम तोड़ देता है ।

एआई, बेरोजगारी और वैश्विक खतरा

दुनिया के बड़े धनपशुओं में एक बड़े धनपशु बेल गेट्स ने कहा है कि अमेरिका में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के कारण 20 प्रतिशत नौकरियाँ जा सकती हैं । अमेरिका की कुल आबादी 30 करोड़ है। पूरी दुनिया का सबसे बड़ा लुटेरा अमेरिका है। वहाँ भी बेरोजगारी के खतरे हैं ।

हमारे यहाँ तो एक अरब चालीस करोड़ की आबादी है। महात्मा गांधी, डॉ लोहिया आदि ने रास्ते सुझाए थे। तकनीक का ऐसा विकास करो कि सभी को काम मिले। सरकार ने उनकी बात नहीं मानी ।

सरकार की प्राथमिकताएं और विदेश नीति

पश्चिम देशों में हो रहे विकास की चमक में हम अंधे होते गये और उसके नक़्शेक़दम पर चलते रहे। नतीजा है कि स्वदेशी सरकार को भी विदेशों के ख़ून लग गए । वैसे भी इनके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है । इनके पास हिन्दू मुसलमान के सिवा दूसरा कोई एजेंडा नहीं है ।

यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने जो भी वादे किए, उनमें नब्बे फ़ीसदी पूरे नहीं हुए ।

पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि और अमेरिकी दबाव

दुर्भाग्य ने इतने से पीछा नहीं छोड़ा । अमेरिका ने हुक्म बजाया कि तुम्हें हमसे तेल ख़रीदना है और हमसे ही 18 फ़ीसदी कर के साथ सामान आयात करना है। एक अरब चालीस करोड़ लोगों की इज़्ज़त कूड़े में मिल गई ।

आज पुनः पेट्रोल- डीज़ल के दाम बढ़ाए गए । ईरान और रूस सस्ते दरों पर तेल दे रहा था। अमेरिका के दबाव से हमने दोनों देशों से दोस्ती तोड़ी । जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला।

मनमोहन सिंह सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें ज़्यादा थीं, तब भी पेट्रोल की क़ीमत 72 रुपये लीटर थी। नरेंद्र मोदी , बाबा रामदेव, अनुपम खेर, अमिताभ बच्चन आदि ने खूब ड्रामे किए थे। अब सौ के पार है।

NEET पेपर लीक और युवाओं की चुप्पी

नीट की परीक्षा की पेपर-लीक हुई । 22 लाख छात्र शामिल होने वाले थे। यह लीक पहली बार नहीं हुई है ।

वे छात्र संगठन कहाँ हैं जो क्रांति की बात करते हैं या छात्रों की इतनी संख्या है, वे इतने डरे हुए और बिखरे क्यों हैं?

मसीहा की तलाश और युवाओं का भविष्य

बंगाल में 27 लाख वोटर मतदाता सूची में नहीं हैं तो हज़ार- बाज़ार लोग भी तो सड़क पर खड़ा होकर नारा लगाये ।

यह बात हमें समझ लेनी चाहिए कि कोई मसीहा नहीं आयेगा, न मंदिर से, न मस्जिद से , न गिरिजाघर से कोई उद्धारक आयेगा ।

तुम चाहे जितनी मूर्तियां बैठा लो, तुम्हारी दुर्गति ख़त्म नहीं होने वाली । मूर्तियां या इमारतें कोई नवरचना नहीं करती। ढकोसला और पाखंड का सहारा लेकर कोई समाज या देश महान नहीं हो सकता ।

मुख्य न्यायाधीश ने तुम्हें परजीवी और कॉकरोच की संज्ञा दी। यह उनका तो अहंकार है ही, लेकिन तुम्हारी भी कम गलती नहीं है।

तुम मसीहा के तलाश में भटकते रहे और जो मसीहा थे , वे गालियाँ बकते रहे।

मैं तो कहूँगा कि तुम दोयम दर्जे के सूर्यकांत से बहुत बेहतर इंसान हो सकते हो, सिर्फ़ अंदर से आवाज़ दो। तुम मनुष्य हो, दुनिया के लिए नया रास्ता गढ़ सकते हो ।

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