Sen your news articles to publish at [email protected]
विकृति की स्वीकृति: स्कूलों को बंद कर मंदिर बना दो, विज्ञान की किताबों में आग लगा दो – डॉ. योगेन्द्र
विकृति की स्वीकृति: बढ़िया यह होगा कि सभी स्कूलों को बंद कर मंदिर बना दो। कॉलेज- विश्वविद्यालय- सभी बदमाशों के अड्डे हैं, इसे अंबानी- अड़ानी को चढ़ावे के रूप में दे दो। विज्ञान की किताबों में आग लगा दो। इन किताबों ने बच्चों का दिमाग़ बर्बाद कर रखा है। इतिहास को समुद्र में बहा दो। जो लिखा गया है, वह विकृत इतिहास है।
तुम अपना इतिहास लिखो कि देश के साथ कहाँ कहाँ ग़द्दारी की है। दरअसल तुम्हारे पास अपना इतिहास भी तो नहीं है, जो इतिहास है, वह धोखाधड़ी का इतिहास है। जब देश के नौजवान आज़ादी के लिए अंग्रेज़ों से लड़ रहे थे, तो तुम अंग्रेज़ों की ओर से मुखबिरी कर रहे थे। तुम्हारा इतिहास ही झूठ और लूट का है। अभी भी क्या कर रहे हो? सत्ता भले मिल गई हो, लेकिन हो तुम रंगा सियार ही।
केशव-कुंज और पीएम केयर फंड पर उठाए सवाल
तुम बता सकते हो कि दिल्ली में आलीशान केशव-कुंज कैसे बना? किसने पैसा दिया? हर ज़िले में ज़मीन ख़रीद कर आधुनिक दफ़्तर कैसे बने? पीएम केयर फ़ंड तो उसका है, जिसने चंदा दिया, लेकिन तुमने उसका हिसाब ही नहीं दिया। नेहरू मर कर भी तुम्हें जीने नहीं दे रहे, क्योंकि उन्होंने तेरह वर्ष जेल में बिताए और अपना भवन देश को दान कर दिया। नेहरू ने बहुत कुछ खड़ा किया और तुमने नेहरू के बनायी चीज़ों को बेच दिया। विश्व गुरु बनने के कितने सस्ते रास्ते हैं!
सोनम वांगचुक का अनशन और पेपर लीक का मुद्दा
सोनम वांगचुक अनशन पर हैं। उनके साथ देश के नौजवान हैं। उनकी माँग है कि आप बार-बार हो रही पेपर लीक की ज़िम्मेदारी लें और शिक्षा मंत्री रिजाइन करें। उमस और गर्मी में जंतर-मंतर पर बैठे नौजवानों की माँग मानने की बजाय उन पर ही लांछन लगा रहे हो। मैंने सुना कि कोई व्यक्ति कह रहा था कि जो लोग एक मंदिर नहीं सँभाल सकते तो वे देश को क्या सँभालेंगे? ये लोग कितने भ्रष्ट हैं कि चंदा चोरी के बारे में सरेआम कह रहे हैं कि हिन्दुओं ने मंदिर बनाया, चंदा दिया, अब हिन्दू ही उसे लेकर चले गए तो हायतौबा क्यों मचा रहे हो? यह है इनकी समझ, धार्मिक चंदे की चोरी के बारे में।
‘मंदिरों में चढ़ावा बहुत बड़ा धंधा बन गया है’
चंदा चोर सभी हिन्दुओं का प्रतीक कैसे बन गए? क्या सभी हिन्दुओं को ये लोग बदनाम नहीं कर रहे? मंदिरों में सोने-चाँदी और रुपए चढ़ावे में नहीं चढ़ाना चाहिए। यह एक बहुत बड़ा धंधा बन गया है। राम को क्यों चाहिए सोने की ईंट? करोड़ों करोड़ रुपये? चढ़ावा नहीं आता तो आरएसएस के चंपत राय भी नहीं आते? मंदिर धार्मिक लोगों के हाथ में रहना चाहिए। धार्मिक लोग भी सामान्य और सहज जीवन जीयें। भगवान के दर्शन के लिए वीआईपी पास और निर्धनों के लिए लंबी लाइन। भगवान के दरबार में भी लोग बराबर नहीं हैं। कण कण में भगवान रहते हैं, लेकिन अपने दरबार में भी भगवान अलग-अलग दर्शन देते हैं। धर्म के खेल निराले हैं।
कोर्ट-कचहरी और न्याय व्यवस्था पर तंज
महाराष्ट्र के गृह मंत्री प्रियंक खडगे रूक नहीं रहे। वे लगातार आरएसएस पर सही सवाल कर रहे हैं। एक कोर्ट ने आरएसएस पर ‘अप्रिय बयान’ देने के लिए उन्हें समन भेजा है, लेकिन वे तब भी हमलावर हैं। जब आप अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ते हैं तो कष्ट झेलने की तैयारी भी रखनी ही होगी। कोर्ट तो उलझाने के लिए है ही।
मैं खुद भुक्तभोगी हूँ। 2014 में आचार संहिता के उल्लंघन करने का एक मुक़दमा हुआ और बारह वर्ष से वह चल रहा है। मेरे नाम से किसी ने एक पोस्टर लगा दिया। उस पोस्टर के कारण ही मुक़दमा कर दिया गया। थोड़े-थोड़े अंतराल में कोर्ट जाइए। वकील से मिलिए। जज के सामने हाज़िरी दीजिए। हत्या और बलात्कार जैसे संगीन अपराध के आरोपी की भी सज़ा माफ़ कर दी जाती है, लेकिन एक छोटे से मुक़दमे को झेलते रहिए।
