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Youth Protest: बेशर्मी और अय्याशी? लंदन दौरे से लेकर सड़क की राजनीति तक, डॉ. योगेन्द्र का तीखा लेख
Youth Protest: बेशर्मी और अय्याशी?
देश की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। एक तरफ राहुल गांधी की लगातार सक्रियता चर्चा में है, तो दूसरी ओर युवाओं के बीच उभरती नई राजनीतिक हलचलें सत्ता प्रतिष्ठान के लिए चुनौती बनती दिख रही हैं।
डॉ. योगेन्द्र अपने लेख में राहुल गांधी के अंडमान दौरे और समुद्र में छलांग लगाने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्हें एक ऐसे राजनीतिक नेता के रूप में देखते हैं, जो लगातार जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेखक का मानना है कि तमाम आलोचनाओं, राजनीतिक हमलों और विरोध के बावजूद राहुल गांधी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने हुए हैं।
लेख में कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेता अभिजीत दिपके के भारत आगमन का भी उल्लेख किया गया है। लेखक के अनुसार युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष और राजनीतिक सक्रियता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र में नई राजनीतिक ऊर्जा का संकेत हो सकता है।
डॉ. योगेन्द्र का तर्क है कि युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में केंद्र सरकार अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी है। वे मानते हैं कि बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक चुनौतियों ने युवाओं के भीतर असंतोष को जन्म दिया है, जो भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का आधार बन सकता है।
लेख में लेखक ने यह भी कहा है कि भारतीय राजनीति में कई बार ऐसे आंदोलन सामने आए हैं, जिनकी शुरुआत एक सीमित उद्देश्य से हुई, लेकिन समय के साथ वे व्यापक परिवर्तन के वाहक बन गए। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के गठन और स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक उदाहरण का उल्लेख किया है।
बेशर्मी और अय्याशी
योगेन्द्र ने न्यायपालिका और सरकार से जुड़े कुछ लोगों के लंदन दौरे पर सवाल उठाए हैं। लेखक का कहना है कि जब देश आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा हो, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और औचित्य पर चर्चा होनी चाहिए।
लेख में केंद्र सरकार, महंगाई, बेरोजगारी, कॉरपोरेट प्रभाव और विपक्षी राजनीति को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। लेखक का मत है कि लोकतंत्र में जनता को सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है और सार्वजनिक धन के उपयोग पर पारदर्शिता होनी चाहिए।
डॉ. योगेन्द्र का निष्कर्ष है कि देश की राजनीति एक संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां युवाओं की भूमिका, विपक्ष की रणनीति और सरकार की नीतियां आने वाले समय की दिशा तय करेंगी।
