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Dr Yogendra Article: बंगाल से लेकर गुजरात की हिंसा और पीएम मोदी के ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ बयान पर डॉ. योगेन्द्र का बड़ा हमला
महुआ मोइत्रा पर हमला और बंगाल का चुनावी माहौल
बंगाल में क्या हो रहा है? वोट लूट कर जीत गए तो बादशाह हो गए? डॉ अम्बेडकर का संविधान मर गया? तुम्हारे बाप का राज है? सांसद महुआ मोइत्रा पर भीड़ पत्थर बरसाती रही और पुलिस- प्रशासन चुप रहा। तुम क्या समझते हो , तुम बच जाओगे? अगर तुम्हें हिंसा करना पसंद है तो हिंसा सहने के लिए भी तैयार रहो । सांसद चीखती रही, फ़ोन करती रही और तुम अपने कार्यकर्ताओं को उकसाते रहे। यह लोकतंत्र नहीं है। स्पष्ट रूप से हिटलरी तंत्र है। हिटलर भी बिना मौत के मरा था। अगर आग से खेलोगे तो आग की लहर सहने के लिए तैयार रहो ।
बंगाल की जीत तुम्हारी जीत नहीं है , वह लोकतंत्र का अपहरण है। कोई अपने विचारों के आधार पर कहीं आता जाता है, कोई बात नहीं । लेकिन उसे डरा धमका कर अगर तुम अपनी घुड़साल में लाना चाहते हो तो यह बेवक़ूफ़ी होगी । हर कर्म फल देता है। वह तुम्हारे पास बार – बार लौटता है । आज बीजेपी और आरएसएस के लोग दूसरों को भड़काने में लगे हैं, इसलिए कि सत्ता उनके पास है। सत्ता तो बदलती रहती है । हाँ, किए गए कर्म नहीं बदलते।
भागलपुर और गुजरात हिंसा का ज़िक्र
लोकतंत्र में अगर सत्ता में बैठे लोग हिंसा करने लगें तो जनता को क्या समझाओगे? मैंने भागलपुर की गंगा- कछार को ख़ून से रंगा देखा है । हिंसा का ऐसा तांडव था जि परिहेट ( लकड़ी का एक कठोर टुकड़ा) पर आदमी को रख कर गंडासे से कुटिया दिया जाता था । न जाने कितनी लाशें गंगा में बही और गंगा का पानी बार-बार लाल होता रहा। वर्षों तक पूरा दियारा अशांत रहा। लोग एक दूसरे से डरते थे। हिंसा तबाह ही करती है और उस पर राज्य पोषित हिंसा तो देश और समाज को बर्बाद कर देती है ।
कहा जाता है कि शेर की जीभ को इंसान के ख़ून का स्वाद लग जाय तो वह आदमखोर हो जाता है। गुजरात की हिंसा का स्वाद सत्ता को लग गई थी। वह स्वाद उसे उच्च शिखर तक ले गया । उसे वह तरह तरह से अजमा रहा है। सार्वजनिक मंचों से नफ़रती भाषण और अंदर ही अंदर साज़िश और हिंसा ।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के बयान पर पलटवार
कल नये- नवेले बीजेपी के अक्षम बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन सरेआम आह्वान कर रहे थे कि जंतर मंतर पर बैठे अर्बन नक्सल को बीजेपी कार्यकर्ता ही सबक सिखा सकते हैं । यह शांतिपूर्ण आंदोलन को बर्बाद करने की खुली धमकी है। हिंसा फैलाना का अपराध बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर रहे हैं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई विष्णु का अवतार कह रहे हैं तो किसी एक्टर की पंद्रह महीने की नातिन मोदी जी को लड्डू खिला रही है। खुद प्रधानमंत्री अपने को नॉन बायोलॉजिकल कह रहे हैं, जबकि उनकी माँ थी। प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष यह भूल चुके हैं कि वे जिस देश के शासक हैं, उस देश के पास ख़ून- पसीने की कमाई से बना एक संविधान भी है । इसी संविधान ने उन्हें मौक़ा दिया है। उस संविधान की छाती पर चढ़ कर दाल न दरें। सच्चाई यही है कि मंचों पर गाल बजाना भी नहीं सुहाता ।
नॉन-बायोलॉजिकल’ दावे और ईश्वरीय अवतार पर सवाल
इस दुनिया में जो आये, उनमें कोई नॉन बायोलॉजिकल नहीं थे- न बुद्ध, न महावीर, न गांधी, न मुहम्मद । यहां तक कि राम के भी माता-पिता थे और कृष्ण के भी। इस धरा धाम पर बायलॉजिकल की कथा ही चली है। दैवीय या ईश्वरीय गुण केवल वेशभूषा धारण करने से नहीं आते।
प्रधानमंत्री की कितनी चाहत है कि उन्हें जीते जी ही लोग पूजने लगें। इसके लिए कितने तरह के धंधे करते हैं। कभी केदारनाथ की गुफा में घुस जाते हैं, कभी जजमान बन कर राम में प्राण प्रतिष्ठा करते हैं, कभी तरह तरह की मालाएँ सिर से पांव तक धारण करते हैं । मैं तो ईश्वर में विश्वास नहीं रखता । अगर रखता तो ईश्वर से माँगता कि हे प्रभु, इस अशांत व्यक्ति की इच्छा पूरी करें। जिससे इनको भी शांति मिले और देश को भी।
