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बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों है? डॉ योगेंद्र का नितिन गडकरी पर तीखा प्रहार

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संपादकीय: देश में पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट, ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिंताओं और सत्ता के गलियारों में छिपे पारिवारिक हितों को लेकर प्रख्यात लेखक और विचारक डॉ योगेन्द्र ने अपने स्तंभ ‘इन दिनों’ में बेहद तीखे और गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सड़क मंत्री नितिन गडकरी के बेटों की कंपनियों के टर्नओवर और इस नीति से जनता को होने वाले नुकसान पर खुलकर अपने विचार रखे हैं।

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना: देश और विदेश में घटनाओं की कोई कमी नहीं है ।आजकल हम घटनाओं के बीच ही जीते हैं और मरते हैं । इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया पर घटनाओं और टिप्पणियों का अंबार लगा है। किसे सही मानें, किसे ग़लत- हम सब इसका आकलन नहीं कर पा रहे । ये घटनाएँ आदमी की चेतना को अशांत कर रही हैं । घटनाओं की इतनी हलचल है कि आदमी की संवेदना की भोथरी हो रही हैं ।

घटनाओं की भीड़ में आदमी का खो जाना- इस सदी की सबसे बड़ी दुर्घटना

नतीजा है कि बड़ी से बड़ी घटनाओं पर या तो हम चुप रह जा रहे हैं या सोशल मीडिया पर कुछ लिख कर कर्तव्य निर्वाह कर रहे हैं । घटनाओं की भीड़ में आदमी का खो जाना- इस सदी की सबसे बड़ी दुर्घटना है। खैर। फ़िलहाल ऐसा नहीं लग रहा कि दुनिया में घटनाओं का प्रवाह रूक जाएगा । हमें हर हाल में घटनाओं पर बातचीत करती रहनी पड़ेगी । कई सारी चर्चाओं में से एक चर्चा पेट्रोल में मिलाये जाने वाले इथेनॉल की हो रही है। मुझे पता नहीं है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों में क्या समस्या आती है? उसका माइलेज कम होता है या उसके इंजन पर कोई असर पड़ता है? इन प्रश्नों के उत्तर तो ऑटोमोबाइल इंजीनियर दे सकते हैं या पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी बता सकते हैं । मुझे इन प्रश्नों में नहीं उलझना है। मैं तो इससे उठने वाले नैतिक प्रश्न पर केंद्रित रहूँगा ।

सड़क बनाने में इथेनॉल का इस्तेमाल तो हो नहीं रहा

भारत सरकार में नितिन गडकरी सड़क मंत्री हैं । उन्हें सड़क के बारे में बात करनी चाहिए । लेकिन आजकल उनकी चर्चा इथेनॉल के संदर्भ में ज़ोर- शोर से हो रही है । लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि सड़क बनाने में इथेनॉल का इस्तेमाल तो हो नहीं रहा, फिर वे इथेनॉल के ब्रांड एम्बेसडर कैसे बने हुए हैं? वे कैसे कह रहे हैं कि इथेनॉल से गाड़ियों को कोई हानि नहीं होती ? यहां तक कि वे पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी कर बैठते हैं । सड़क मंत्री ऐसा क्यों और कैसे कह रहे हैं ? आख़िर बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों है? आप जानते ही होंगे कि गडकरी आरएसएस कैंप के लोग हैं । मोहन भागवत जी से उनके गहरे ताल्लुकात हैं। ख़बरों में ख़बर यह है कि गडकरी जी के दो बेटे हैं- सारंग गडकरी और निखिल गडकरी ।

बेटे किसको प्यारे नहीं होते

बेटे किसको प्यारे नहीं होते? उस पर अगर मौक़ा भी हो और दस्तूर भी तो बेटों पर अतिरिक्त प्यार उमड़ आता है। लब्बोलुबाब यह कि गडकरी जी के दोनों बेटों के पास इथेनॉल बनाने वाली अलग-अलग कंपनी है । सारंग गडकरी मानस एग्रो इंडस्ट्रीज़ के मालिक हैं तो निखिल गडकरी सियान एग्रो इंडस्ट्रीज़ के। आय के एक छोटे से आंकड़े को जानिए या समझिए कि सड़क मंत्री इथेनॉल की इतनी पैरवी क्यों कर रहे हैं? सड़क मंत्री के बेटे निखिल गडकरी की सियान इंडस्ट्रीज़ की आय साल 2024 में मात्र 17 करोड़ रुपए थी जो एक वर्ष में 511 करोड़ की हो गयी। ऐसी हालत में गडकरी जी इथेनॉल की पैरवी क्यों नहीं करेंगे? ना खाऊँगा और न खाने दूँगा का दावा करनेवाले लोग किस क़दर जनता को लूट रहे हैं, यह एक छोटा- सा नमूना है। पेट्रोल में बीस प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है। ग्राहक पेट्रोल का पैसा भरता है और उसे मिलता है अशुद्ध पेट्रोल । और फायदा किसे हो रहा है? गडकरी जी के बेटे को । एक अदना नौकरी के लिए आम भारतीय के लड़के हाय तौबा कर रहे हैं और नेताओं के बेटे के दोनों हाथ घी में है। लेकिन सवाल है कि भारत सरकार आख़िर किसकी सरकार है? गडकरी जी के बेटे की या जनता की? आज जो शंकाएँ इथेनॉल को लेकर जनता के बीच हैं, उसे उचित माध्यम से दूर क्यों नहीं किया गया? भारत सरकार ने जब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का फ़ैसला किया तो देशवासियों को भरोसे में क्यों नहीं लिया? इथेनॉल सस्ता था और इससे सरकार की रिवेन्यू बढ़ रही थी, तो जनता के लिए पेट्रोल की क़ीमत क्यों नहीं घटायी?

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