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Dharmendra Pradhan Resignation: सरकार और सोनम वांगचुक की अहम मुलाकात, क्या धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी खतरे में?
Dharmendra Pradhan Resignation: NEET परीक्षा लीक के खिलाफ अनशन पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार रात अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह रात लगभग 12:30 बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।
सोनम वांगचुक ने X पर शेयर किए गए वीडियो में बताया कि लंबी चर्चा और कुछ शर्तों पर सहमति के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा चाहिए था, और उन्हें यह चाहिए था कि मैं इसे लिखित रूप में प्राप्त करूं। इस प्रक्रिया में दो दिन लग गए, जिसके कारण मुझे और अधिक अनशन करना पड़ा। अंततः, आज उन्होंने मुझे लिखित रूप में भरोसा दिया है।”
सरकार ने वांगचुक को निम्नलिखित लिखित आश्वासन दिए:
- छात्रों पर कार्रवाई नहीं: जंतर-मंतर पर शांति से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च में भाग लेने वाले युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई, जैसे FIR, नहीं की जाएगी।
- मृतकों के परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक की इस घटना में जिन 20 से अधिक बच्चों की मृत्यु हुई है, उनके परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
- संसद में पूरी बहस: NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली सहित शिक्षा और परीक्षाओं में सरकार की जिम्मेदारी तय करने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा एवं बहस होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
65 सांसदों का अलग से हस्ताक्षर
65 सांसदों ने अलग से हस्ताक्षर कर अनशन समाप्त करने की मांग की थी और संसद में इसे उठाने का आश्वासन दिया था। वांगचुक ने कहा कि देश में संभावित हिंसा के चलते उन्होंने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर वांगचुक ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें इस विषय पर कोई आश्वासन नहीं मिला है। उन्होंने कहा, “आपको जरूर यह जानने की इच्छा होगी कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ। सबसे पहली बात तो यह है कि वे मुझे यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि यह कब होगा।”
सोनम ने क्या कुछ कहा
उन्होंने कहा कि मेरे सामने दो रास्ते थे: या तो मैं कई हफ्तों तक भूख हड़ताल पर बैठा रहूँ, जिससे मेरी जान भी जा सकती है, या फिर कोई और रास्ता तलाश करूँ। यदि प्रधान मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इससे बच्चों या हमें कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि केवल सरकार को ही नुकसान पहुंचेगा। उन्हें इस्तीफा देने का निर्णय लेना चाहिए था, क्योंकि ऐसा करने से काफी नुकसान पहले ही टल सकता था।
वांगचुक ने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि बच्चे किसी मामले में न फंसें और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा मिले। उन्होंने यह भी बताया कि यह लक्ष्य हमने प्राप्त कर लिया है, और इससे वह संतुष्ट हैं। अब भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था, संसद में इस मुद्दे और जवाबदेही पर पूरी तरह से बहस आयोजित की जाएगी।
