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Patna High Court Verdict: धार्मिक जुलूस और प्रशासन की पाबंदी पर पटना हाईकोर्ट का फैसला, जानिए क्या कहा कोर्ट ने
Patna High Court Verdict: धार्मिक जुलूस आयोजित करना संविधान द्वारा मौलिक अधिकार माना जाता है, किंतु यह अधिकार बिना किसी सीमाओं के नहीं है।
सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य के मद्देनजर, प्रशासन धार्मिक जुलूस पर उचित रूप से प्रतिबंध लगा सकता है।
पटना उच्च न्यायालय ने सिवान के हथौड़ा गांव में आयोजित अखाड़ा-1 के महाबीरी जुलूस में 300 भक्तों को शामिल होने और पारंपरिक मार्ग से जुलूस निकालने की मांग को अस्वीकार करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
यह अधिकार उचित प्रतिबंध के अधीन है।
न्यायाधीश आलोक कुमार की एकलपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(बी) और 25 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लागू होते हैं।
हथौड़ा के निवासी भदई चौधरी ने याचिका दायर की थी, जिसमें बताया गया था कि अखाड़ा नंबर-1 को 1958 से महाबीरी जुलूस निकालने की अनुमति मिलती आई थी।
2012 और 2013 में 200 भक्तों को जुलूस में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 2014 में यह संख्या घटाकर 150, 2015 में 100 और वर्ष 2023 से केवल पांच भक्तों तक सीमित कर दी गई।
साथ ही, पारंपरिक मार्ग में भी परिवर्तन किया गया। याचिकाकर्ता ने पुराने मार्ग से कम से कम 300 श्रद्धालुओं के साथ जुलूस निकालने की अनुमति मांगी थी।
राज्य सरकार ने अपने निर्णय को कानून-व्यवस्था से संबंधित ठहराया। सरकार के अनुसार, 2015 से 2022 के बीच अनुमोदित जुलूसों की संख्या पांच होने के बावजूद, 1700 से 2000 लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा होती रही और इस दौरान कई मामले दर्ज हुए।
2024 की घटना का जिक्र करते हुए सरकार ने सरकारी वाहनों को जलाने और पुलिस पर पथराव करने का आरोप लगाया। हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक आज़ादी केवल तब तक मान्य है जब वह लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर हो।
हालांकि धार्मिक जुलूस का अधिकार संरक्षित है, लेकिन यह तय करना कि जुलूस किस प्रकार, किस मार्ग से और कितनी संख्या में लोगों के साथ निकलेगा, यह सभी पहलू मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में केवल पांच व्यक्तियों को ही अनुमति दी जाएगी, लेकिन इस आधार पर अभी कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।
अनुमति की संख्या स्थानीय कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाएगी। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने याचिका को अस्वीकार कर दिया।
