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Aryabhatta Knowledge University Scam: अवैध नियुक्तियों से फंड के दुरुपयोग तक जांच हुई तेज

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Aryabhatta Knowledge University Scam: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में गंभीर अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं। यहाँ पर कार्पस फंड का अनुचित उपयोग, वित्तीय बुराईयां, अवैध नियुक्तियाँ, निविदा प्रक्रिया के बिना सामग्री की खरीद, आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ सांठ-गांठ और यात्रा भत्ते के गलत भुगतान जैसे मुद्दे राज्यपाल सचिवालय के ध्यान में आए हैं।

इस संबंध में, राज्यपाल और कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पीके (पवन कुमार) सिन्हा के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी। यह समिति 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्यपाल सचिवालय को प्रस्तुत करेगी।

जांच समिति में गृह विभाग के संयुक्त सचिव समेत कई लोग शामिल

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि राज्यपाल के निर्देश पर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं और अन्य वित्तीय उल्लंघनों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के समन्वयक के रूप में उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा नियुक्त किए गए हैं।

जांच समिति में गृह विभाग के संयुक्त सचिव मो. जमील, अभियोजन निदेशालय के उप निदेशक रविकांत देव, और शिक्षा विभाग के उप सचिव रामानुज प्रसाद सिंह को भी शामिल किया गया है।

जांच के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की गई है। यदि किसी अन्य दस्तावेज या अभिलेख की आवश्यकता पाई जाती है, तो कुलसचिव को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है कि संबंधित कागजात समय पर जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।

अगर जांच प्रक्रिया से संबंधित किसी अन्य प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ी, तो राज्यपाल सचिवालय से संपर्क किया जाएगा।

जेम पोर्टल के माध्यम से करोड़ों की खरीद में अनियमितताएं

राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में जेम पोर्टल का उपयोग करते हुए करोड़ों की खरीद में असामान्यताएं पाई गई हैं। जेम पोर्टल एक ऑनलाइन मंच है, जिसे केंद्र सरकार ने अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की पारदर्शी और सुलभ खरीद को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया है।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय स्तर पर कुछ निजी कॉलेजों को नियमों के खिलाफ मान्यता दिए जाने के मामले भी उजागर हुए हैं। यह जांच 1344 पन्नों के दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर की जाएगी। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस विश्वविद्यालय के संचित निधि (कार्पस फंड) के दुरुपयोग का मामला सबसे गंभीर है, जिसमें करोड़ों रुपये की निकासी की गई है। इसके अलावा, ”एलीट फाल्कन्स” नामक आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए पैसे लेकर विश्वविद्यालय में हुए बड़े पैमाने पर नियुक्तियों की भी जांच की जाएगी।

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