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AI के बढ़ते खतरे के बीच बदल रहा इंसान, जीनोम तकनीक से मानव भविष्य पर सवाल
AI के बढ़ते खतरे: पुनपुन की ओर से पटना- प्रवेश कर रहा हूँ। हज़ारों घर पानी के बीच ही खड़े हैं । छोटी छोटी गलियाँ। सटे हुए घर। एक घर आसानी से दूसरे घर में आसानी से ताकझांक कर सकता है। स्टेशन पर उतरो तो सामने हनुमान मंदिर। टैक्सी, लोग और भक्त जन। ऑवरब्रिज के फूल बेचने वाले और सड़क किनारे सैकड़ों निर्धन लोग।
उन्हें देखकर लग जायेगा कि बिहार बहुत बीमार है। मुझे पटना आने में डर सा लगता है। जिस पटना में आया करता था, वह पटना अब नहीं है। ऑवरब्रिज , जल जमाव और बेतहाशा बढ़ती आबादी वाला शहर। देहात में रहने की मुश्किलें जब बढ़ती जा रही हैं , तो लोग शहर की ओर मुख़ातिब हैं। संसाधनों के केंद्रीकरण से आबादी का केंद्रीकरण बढ़ रहा है।
मैं खुद भी शहर कैसे आया? पढ़ाई करने भागलपुर, फिर मुंगेर, फिर भागलपुर। गांव खोता चला गया। गांव से मैं उखड़ गया। अब गांव जाता हूँ तो अजनबी की तरह लगता है। माता- पिता, बड़े भाई, भाभी रहे नहीं। वे सारे दोस्त जो गलियों में चौफेर दिया करते थे।
उनमें से कई विदा हो गए। कइयों ने शहर में घर ले लिया। एकाध हैं, लेकिन हम दोनों के बीच अजनबीपन पसर गया है। कह सकते हैं कि उखड़े हुए लोगों में शामिल हो गया हूँ ।
शहर में कॉलेज था, नौकरी भी। फिर मैं कहाँ जाता? मेरे ही तरह करोड़ों लोग शहर में ज़िंदगी तलाशने आते हैं और अजनबी बन कर ज़िंदगी गुजार देते हैं ज़िंदगियों की सहजता चुक जाती है। दायरे सिकुड़ते जाते हैं। हरारी अपनी किताब में लिखते हैं कि 2050 तक होमोसेपियंस अपना स्वभाव बदल लेगा। यानी उसका ट्रांसफॉर्मेशन हो जाएगा।
यह सब जीनोम तकनीक के द्वारा होगा। दूसरी तरफ एआई उपकरण की तलाश मनुष्य ने की। एआई मनुष्य को धीरे-धीरे बदलने लगा। अब वह इतना ताक़तवर हो गया है कि मनुष्य को मार सकता है। बिल गेट्स जैसे पूँजीपति चेतावनी भरे अंदाज में कह रहे है कि एआई की तकनीक इतनी ज्यादा ताकतवर है कि यह ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकती है, जिससे अरबों लोगों की मौत तक हो सकती है।
हाल में ही सिलिकॉन वैली में एआई के जोखिमों को लेकर यह नया विवाद तब शुरू हुआ जब एथ्रोपिक कंपनी के एक कर्मचारी जैकब कॉक्सन ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपनी पूर्व नियोक्ता कंपनियों एथ्रोपिक और ओपनएआई पर यह गंभीर आरोप लगाया कि वे सुपर-इंटेलिजेंट एआई की दौड़ में जल्दबाजी करके हमारी जिंदगियों के साथ जुआ खेल रहे हैं।
संसाधन हीन होते लोग, फिर मनुष्य की जीन को बदलने की तैयारी और एआई का मनुष्य से ताक़तवर होना – ये संकेत यह बताते हैं कि मानव ने जो कुछ अर्जित किया, क्या वह नष्ट होने वाला है? जो सभ्यता, और संस्कृति विकसित हुई उसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा ? मशीनी सभ्यता की संस्कृति अलग होगी और अब तक के योगदान कूड़ेदान में डाल दिया जाएगा ।
उखड़े हुए लोगों की उखड़ी हुई संस्कृति किस मुकाम पर पहुंचेगी, कहा नहीं जा सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर तथाकथित ज्ञानी और लोभी लोगों ने दुनिया में भूचाल मनाने की तैयारी तो कर डाली है।
