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Bihar Economic Crisis: बिहार की आर्थिक तस्वीर डराने वाली! गोवा-सिक्किम से इतनी कम है कमाई

ChatGPT Image May 25, 2026, 07 52 06 AM
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Bihar Economic Crisis: बिहार का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान अब भी तीन प्रतिशत से कम है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि राज्य की जीडीपी की हिस्सेदारी केवल 2.9 प्रतिशत है। इस बीच, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात जैसे पांच राज्यों ने मिलकर लगभग 48 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनाई है।

प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य काफी पीछे

हालांकि बिहार की आर्थिक वृद्धि दर में सुधार हुआ है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य काफी पीछे है। गोवा और सिक्किम की तुलना में स्थिति और भी निराशाजनक है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की प्रति व्यक्ति आय लगभग 69 हजार रुपये है, जो गोवा और सिक्किम के नागरिकों की आय से आठ गुना कम है।

रूप से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय असमानता किस हद तक बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की जीएसडीपी में वृद्धि का मुख्य कारण निर्माण गतिविधियाँ और सरकारी खर्च है।

औद्योगीकरण की गति धीमी चल रही

फिर भी, राज्य की अर्थव्यवस्था अभी भी पारंपरिक कृषि पर निर्भर बनी हुई है, और औद्योगीकरण की गति धीमी चल रही है। इसका परिणाम यह है कि आर्थिक विकास के फायदों का असर आम लोगों की आय पर पूरी तरह से नहीं दिखाई दे रहा है।

वित्त वर्ष 2025 में, देश में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 83 प्रतिशत केवल पांच राज्यों में चला गया। बिहार को तो कुल FDI का आधा प्रतिशत भी प्राप्त नहीं हो सका, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

बिहार की विकास दर 13 प्रतिशत

बिहार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इनमें औद्योगीकरण और शहरीकरण को प्रोत्साहित करने, निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने, कृषि को आधुनिक बनाने, और आधारभूत संरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।

इसके साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और जनसंख्या नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की विकास दर 13 प्रतिशत से अधिक रही है, जो कई बड़े राज्यों से अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राज्य में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं, तो बिहार आने वाले वर्षों में देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बना सकता है।

राज्यों को चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. स्थापित प्रमुख राज्य: इनमें गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शामिल हैं।
  2. उच्च क्षमता वाले प्रदर्शनकर्ता: इस श्रेणी में दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा आते हैं।
  3. सुधार की संभावना वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल इस श्रेणी में आते हैं।
  4. राजकोषीय पुनर्वास की आवश्यकता वाले राज्य: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और जम्मू-कश्मीर को इसमें रखा गया है।

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