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चैंपियन एजुकेटर्स चैंपियनशिप 2026: जमशेदपुर में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने वाले 6 शिक्षक हुए सम्मानित
चैंपियन एजुकेटर्स चैंपियनशिप 2026: युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित होटल बुलेवार्ड में चैंपियन एजुकेटर्स चैंपियनशिप 2026 का भव्य आयोजन किया गया। सामाजिक संस्था पीपुल फॉर चेंज द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा, युवाओं की भागीदारी और आधुनिक नेतृत्व पर एक जीवंत व सार्थक संवाद का मंच साबित हुआ।
रूमी की पंक्तियों से औपचारिक शुरुआत और खेलों का आनंद
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद अनूठे अंदाज में परिचयात्मक गतिविधियों और कुछ मजेदार खेलों के साथ हुई, जिसने शिक्षकों और युवाओं के बीच की औपचारिक झिझक को दूर कर एक सहज वातावरण तैयार किया। इसके बाद सूफी संत रूमी की प्रसिद्ध पंक्ति—“सही और गलत के उस पार एक मैदान है, मैं वहाँ मिलूँगा तुम्हें” के संदेश के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। संस्था ने इस बात पर जोर दिया कि आज के शैक्षणिक माहौल को भय और भेदभाव से मुक्त होना चाहिए, जहाँ बच्चे आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय ले सकें।
विद्यार्थियों के नामांकन पर चुने गए ये 6 ‘चैंपियन शिक्षक’
इस समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब शिक्षकों का परिचय उनके नाम से नहीं, बल्कि उन्हें नामांकित करने वाले छात्रों के वीडियो और संदेशों के जरिए कराया गया। विद्यार्थियों की आँखों और शब्दों में अपने गुरुओं के प्रति सम्मान देखकर पूरा सभागार भावुक हो उठा।
पीपुल फॉर चेंज द्वारा सम्मानित किए गए 6 चैंपियन शिक्षक निम्नलिखित हैं:
- ईशिता डे – तारापोर स्कूल, जमशेदपुर
- आशु तिवारी – सेंट जोसेफ्स हाई स्कूल
- अरविंद तिवारी – उत्क्रमित उच्च विद्यालय, तंगराई
- नंदिनी शुक्ला – केरल समाजम मॉडल स्कूल, जमशेदपुर
- सिस्टर हिल्डा – लिटिल फ्लावर स्कूल
- सबनम होरो – उत्क्रमित मध्य विद्यालय, हितकू
सम्मान प्राप्त करने के बाद शिक्षकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नेतृत्व बच्चों को सिखाया नहीं जा सकता, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी देकर इसे जीने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा को केवल अंकों तक सीमित न रखकर अच्छे इंसान गढ़ने का जरिया बनाया जाना चाहिए।
सम्मान प्राप्त करने के बाद शिक्षकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नेतृत्व बच्चों को सिखाया नहीं जा सकता, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी देकर इसे जीने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा को केवल अंकों तक सीमित न रखकर अच्छे इंसान गढ़ने का जरिया बनाया जाना चाहिए।
पैनल चर्चा: परीक्षा के लिए शिक्षा या जीवन के लिए?
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक विशेष पैनल चर्चा रही, जिसका सफल संचालन पीपुल फॉर चेंज के सौविक साहा ने किया। इस चर्चा में कई गंभीर सवाल उठाए गए कि क्या आज की शिक्षा व्यवस्था केवल नौकरी पाने के लिए है या जीवन जीने के लिए? चर्चा में शामिल युवा नेताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे ऐसे स्कूल-कॉलेज चाहते हैं जहाँ उनके विचारों को सुना और उनका सम्मान किया जाए।
फिल्मों के प्रदर्शन और ग्रुप डिस्कशन से खोजे गए समाधान
समारोह के दौरान दो बेहद प्रेरणादायक शॉर्ट फिल्में—“माननीय राष्ट्रपति जी को एक खत” और * “The Class of Rowdies”* दिखाई गईं। इन फिल्मों ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि शिक्षा किस तरह युवाओं को अपनी आवाज पहचानने और बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है।
इसके बाद हुए राउंड टेबल ग्रुप डिस्कशन में शिक्षकों और युवाओं ने मिलकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जैसे:
स्कूलों में नियमित और पारदर्शी संवाद का माहौल बने।
छात्रों को निर्णय लेने और स्कूल प्रबंधन में भागीदारी के अधिक अवसर मिलें।
शिक्षा में जीवन कौशल (Life Skills) और संवेदनशीलता को प्रमुखता से शामिल किया जाए।
आगे की राह और बदलाव का संकल्प
समारोह के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्तर पर सकारात्मक बदलाव शुरू करने का एक छोटा सा संकल्प लिया। पीपुल फॉर चेंज ने घोषणा की कि पैनल और राउंड टेबल चर्चा से निकले सभी महत्वपूर्ण सुझावों को संकलित कर लिया गया है। संस्था आने वाले समय में इन विचारों को धरातल पर उतारने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना पर काम करेगी।
