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मेडिकल क्षेत्र में विकसित हो कॉपरेटिव व्यवस्था, विदेशों में पढ़ाई से दूर होगी डॉक्टरों की कमी: प्रोफेसर रणवीर नंदन
पटना। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष व पूर्व विधान पार्षद प्रोफेसर रणवीर नंदन ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने के लिए मेडिकल के क्षेत्र में कॉपरेटिव (सहकारी) व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है। रविवार को पटना के होटल मौर्य में ‘एजुकेशन वाइब्स’ द्वारा आयोजित ‘मेडिकल एजुकेशन इन एब्रॉड’ (विदेशों में चिकित्सा शिक्षा) विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
प्रोफेसर नंदन ने कॉपरेटिव मॉडल को समझाते हुए कहा कि इसके तहत समाज के सक्षम लोगों को मेडिकल उपकरण और दवाओं की व्यवस्था करनी चाहिए, जबकि शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को सप्ताह में कम से कम एक दिन गांवों में जाकर अपनी सेवाएं देनी चाहिए। उन्होंने पटना को पूर्वी भारत का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र बताते हुए कहा कि यहाँ के छात्र बेहद प्रेरित (हाइली मोटिवेटेड) हैं। भारत में आबादी के मुकाबले डॉक्टरों की कमी को दूर करने में ‘एजुकेशन वाइब्स’ जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे डॉक्टर-मरीज का अनुपात बेहतर होगा। उन्होंने संस्था को विदेश जाने वाले छात्रों के प्लेसमेंट का डेटा रखने का भी सुझाव दिया।
इस सेमिनार में जॉर्जिया से आए वाइस रेक्टर व लाइफ साइंस के प्राध्यापक डॉ. जुराब ने छात्रों को विदेश में मेडिकल पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। वहीं, एजुकेशन वाइब्स के निदेशक सिद्धार्थ सिन्हा ने बताया कि उनकी संस्था बिहार और देश के बच्चों को बजट के अनुकूल घरेलू व विदेशी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का अवसर देती है, ताकि सीटें सीमित होने के कारण कोई मेधावी छात्र डॉक्टर बनने से न चूके। कार्यक्रम के अंत में जदयू नेता श्याम पटेल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
