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जेन जी: संभावनाओं से भरी और नया इतिहास लिखने की तैयारी

gen z sambhavnayon se bhari aur naya itihas likhne ki taiyari dr yogendra
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लेखक: डॉ योगेन्द्र

जेन जी ने बंद रास्तों को खोल दिया है। जो लोग सरकार से डर कर चुप बैठे थे, उनकी ज़ुबान भी खुल गयी है। यहाँ तक कि देखादेखी जेन अल्फ़ा ने भी अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद की है। जेन अल्फ़ा वह पीढ़ी है जो 2012 के बाद आयी है। वह स्कूलों के प्रांगण में मुखर है।

जो लोग सोच रहे थे कि नयी पीढ़ी स्वप्नविहीन और विचारहीन है और देश में कोई संभावना नहीं है, उसकी आँखें भी खुल गयी हैं। जेन जी पीढ़ी विचारवान भी है और निर्भय भी। वह सत्ता से टकराने की कूबत रखती है।

बांग्लादेश, नेपाल और भारत के संदर्भ में जेन जी

बांग्लादेश, पेरू, नेपाल में बदलाव के बाद अब जेन जी भारत में आंदोलन कर रहे हैं। यह सही है कि भारत नेपाल और बांग्लादेश नहीं है, लेकिन यहां युवा पीढ़ी कम पीड़ित नहीं हैं और उसके अंदर आक्रोश कम नहीं है।

युवा पीढ़ी भीषण बेरोजगारी और महंगी होती शिक्षा से जूझ रही है। सरकार सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की संख्या बढ़ाने के बजाय घटाती जा रही है और शिक्षा को पूँजीपतियों के हाथों सौंपती जा रही है। पूँजीपतियों के हाथों शिक्षा सौंप कर सरकार यह सोच रही है कि आनेवाली पीढ़ी इसे भी बर्दाश्त कर लेगी। उसे शिक्षण संस्थानों को स्थापित करने में रुचि नहीं है, इसलिए सरकार शिक्षा का बजट भी घटाती जा रही है।

उसे स्कूलों से ज़्यादा मंदिरों में रुचि है। अभी बहुसंख्यक राजनीति को हवा देकर चुनाव जीतती रही। हिन्दुओं को खुश करने के लिए वह मंदिरों की ओर मुख़ातिब हुई। एक धर्मनिरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री जजमान बनने लगे और साधुओं का वेश धारण कर हिंदुओं की कमजोर नसों से खेलने लगे। हर चुनाव का मैदान हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच नफ़रत बेचने का मैदान बन गया।

पिछले बारह सालों में नफ़रत की राजनीति ने माहौल को और भी गंदा किया है। जब बीजेपी सरकार आयी थी तो एक साल में दो करोड़ नौकरियाँ देने का वादा किया था। उन्होंने जेन-जी को पकौड़े तलने का रोज़गार थमा दिया। दरअसल सरकार यह समझने में विफल रही कि वह सभी चुनावों में पुराने टोटके के आधार पर चुनाव नहीं जीत सकती।

नई पीढ़ी और बदलती राजनीति

जो पीढ़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “हर हर मोदी” के नारे लगाती थी, उस पीढ़ी की साँसें उखड़ चुकी हैं और अब सरकार के सामने जेन-जी नामक नयी पीढ़ी है।

जेन जी पीढ़ी का जन्म 1997 के बाद हुई और वह नयी भाषा और नये मुहावरे लेकर मैदान में है। वह खुलेआम सत्ता को खुली चुनौती दे रही है—”हम आपको मजाक बना देंगे। सबसे स्ट्रांग छब्बीस इंच के नेता को हँसी का पात्र बना देंगे।”

जेन-जी जन्म के साथ स्मार्टफ़ोन लेकर आयी है। डिजिटल दुनिया का माहिर खिलाड़ी है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल वह बख़ूबी जानती है।

जंतर-मंतर से जब सोशल मीडिया के माध्यम से रील और मीम के ज़रिए सरकार पर हमला करने लगी तो आधी रात को प्रधानमंत्री नींद से जग गये और वे भी इंस्टाग्राम पर रील बनाने लगे।

इंस्टाग्राम जैसी मीडिया को उम्रदराज़ युवाओं की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते। उन्होंने जब जेन जी को “हेलो फ़्रेंड्स” कहा तो जेन जी ने खुल कर कहा कि हमलोग आपके फ़्रेंड्स नहीं हैं।

आज भी सरकार जेन-जी को समझ नहीं रही है। यह पुरानी पीढ़ी नहीं है जो हिन्दू-मुसलमान के नेराटिव में फँस जाए। सरकार और उसके लोग अब भी उस पर पुराने तरीक़े अपना रही है।

प्रधानमंत्री एक तरफ यह घोषणा करते हैं कि गाली देनेवाले को माफ कर देंगे, दूसरी तरफ उनकी पुलिस ढूंढ-ढूँढकर मुकदमे कर रही है और उनके लंपट लड़कियों को प्रताड़ित करने में लगे हैं।

एक छोटा सी बच्ची रुचिका शर्मा पर जिस तरह के ज़ुल्म हुए, उसे जेन जी पीढ़ी भूल नहीं पायेगी। सरकार और उसके लोग आग में घी डाल रहे हैं। सरकार को मालूम नहीं है कि जेन जी सत्रहवीं शताब्दी का पाठ नहीं पढ़ेगी। वह तो वर्तमान के सत्य-असत्य को देख रही है और भोग रही है।

जेन जी किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है?

क्या नयी पीढ़ी यह भूल पाएगी कि प्रधानमंत्री अपनी डिग्री तक नहीं दिखा सकते? क्या यह भी भूल पायेगी कि प्रधानमंत्री अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करते हुए कोविड जैसी बीमारी से निपटने के लिए ताली और थाली बजाबा रहे थे?

इतिहास संबंधी ग़लत जानकारी लोगों के सामने परोसने की तो उनकी आदत ही है। झूठे वादों का पिटारा भी अब किसी काम के लायक़ नहीं रहा।

जेन जी को तोड़ने और उसे लुभावने की हर तरफ से कोशिश चल रही है, लेकिन यह पीढ़ी किसी की धौंस में नहीं आनेवाली।

यह खुले विचारों वाली पीढ़ी है। यह शिक्षा, कैरियर, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर साफ-साफ कहती है।

यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में युवाओं के आंदोलनों, उपभोक्ता-रूझानों और डिजिटल अभियानों में उसकी भूमिका तेज़ी से बढ़ी है।

यह पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी और कंटेंट क्रिएशन को नयी दिशा देने को तत्पर है।

बीजेपी के मुँहफट नेता रमेश बिधूडी इसे पंचर वालों की औलाद और सांसद कंगना रनौत ने गटर का कीड़ा कहा। आरएसएस के लोग देशद्रोही कहा, लेकिन सच यह है कि नयी पीढ़ी संभावनाओं से भरी है और देश में नया इतिहास लिखने जा रही है।

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