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Jharkhand High Court Biomedical Waste पर फैसला: 30 बेड से अधिक अस्पतालों में बनेगी बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमिटी, 30 या कम बेड पर नोडल अधिकारी अनिवार्य
Jharkhand High Court Biomedical Waste: बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन की मांग को लेकर झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस (JHRC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य के मुख्य सचिव और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को भी भेजी गई है। JHRC का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के छह माह बाद भी बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण से जुड़े अहम निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है।
14 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया महत्वपूर्ण फैसला
झारखंड हाई कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को PIL Case No. W.P. (PIL) No. 1385 of 2012 में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। आदेश का Neutral Citation No. 2026:JHHC:5689-DB है।
यह मामला वर्ष 2012 से बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रह, परिवहन, उपचार और अंतिम निपटारे से जुड़े मुद्दों को लेकर न्यायालय के समक्ष चल रहा था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार, जिला प्रशासन, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB), स्वास्थ्य विभाग, नगर निकायों और Healthcare Facilities की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है।
हाई कोर्ट ने बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन के मुद्दे को नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षित पर्यावरण और संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के अधिकार से भी जोड़ा है।
30 बेड से अधिक अस्पतालों में अनिवार्य होगी कमिटी
हाई कोर्ट के आदेश के तहत 30 से अधिक बेड वाले प्रत्येक Healthcare Facility में Bio-Medical Waste Management Committee गठित करने की व्यवस्था की गई है।
इस कमिटी की जिम्मेदारी अस्पताल के भीतर बायोमेडिकल वेस्ट के:
- पृथक्करण
- संग्रह
- भंडारण
- परिवहन
- उपचार
- निपटान
से जुड़ी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना होगा।
30 या उससे कम बेड वाले अस्पताल में नोडल अधिकारी
30 या उससे कम बेड वाले Healthcare Facilities में एक जिम्मेदार Nodal Officer नियुक्त किया जाएगा।
नोडल अधिकारी का:
- नाम
- पद
- संपर्क विवरण
अस्पताल की वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा। जिन संस्थानों की वेबसाइट नहीं है, वहां अस्पताल परिसर में ऐसी जगह पर इसकी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी, जहां आम लोग उसे आसानी से देख सकें।
इन व्यवस्थाओं के अनुपालन की निगरानी District Level Monitoring Committee करेगी।
उपायुक्त की भूमिका भी होगी अहम
हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन, विशेष रूप से Deputy Commissioner/District Magistrate, की भूमिका को भी स्पष्ट किया है।
उपायुक्त को यह सुनिश्चित करना होगा कि बायोमेडिकल वेस्ट को सामान्य नगर कचरे यानी Municipal Solid Waste के साथ नहीं मिलाया जाए। इसके अलावा जिले में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की नियमित समीक्षा करनी होगी।
इस समीक्षा में Civil Surgeon, JSPCB अधिकारियों और संबंधित Municipal/Urban Local Body के अधिकारियों को शामिल किया जाना है। निरीक्षण, निगरानी और enforcement कार्रवाई में JSPCB को जिला प्रशासन की आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करानी होगी।
60 दिनों में सक्रिय करनी होगी जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमिटी
हाई कोर्ट ने Bio-Medical Waste Management Rules के तहत गठित District Level Monitoring Committees को प्रभावी रूप से काम करने का निर्देश दिया है।
जहां ऐसी समितियां काम नहीं कर रही हैं, उन्हें 60 दिनों के भीतर operational करना होगा। यह समिति अस्पतालों में गठित Biomedical Waste Management Committee और नियुक्त Nodal Officer से जुड़े अनुपालन की भी निगरानी करेगी।
अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण से जोड़ा गया अनुपालन
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार Healthcare/Clinical Establishments के registration और renewal के दौरान Bio-Medical Waste Management Rules, 2016 के अनुपालन को आवश्यक शर्त माना जाएगा।
गंभीर या लगातार उल्लंघन पाए जाने पर नियमों के अनुसार संबंधित संस्थान के registration के खिलाफ कार्रवाई, suspension अथवा cancellation की कार्रवाई की जा सकती है।
30 दिनों में नियुक्त होगा राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी
राज्य सरकार को Secretary स्तर का State Level Nodal Officer नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। यह अधिकारी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, Bio-Medical Waste Management Rules, 2016 के implementation की निगरानी और राज्य स्तर पर compliance monitoring का काम करेगा।
इसके लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है।
पूरे झारखंड में होगा Biomedical Waste Infrastructure का Gap Analysis
राज्य सरकार और JSPCB के समन्वय से पूरे झारखंड में Biomedical Waste Treatment Infrastructure का State-wide Gap Analysis किया जाएगा।
इसमें मौजूदा treatment capacity, जिन जिलों या क्षेत्रों में सुविधा की कमी है, वर्तमान infrastructure की पर्याप्तता और भविष्य में आवश्यक अतिरिक्त क्षमता का आकलन किया जाएगा।
यह Gap Analysis तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
JSPCB तैयार करेगा सभी Healthcare Facilities का जिला-वार रिकॉर्ड
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राज्य के सभी Biomedical Waste generating Healthcare Facilities और authorised Common Bio-Medical Waste Treatment Facilities (CBMWTFs) का district-wise inventory तैयार करना होगा और इसे समय-समय पर अपडेट करना होगा।
प्रत्येक Healthcare Facility के पास वैध Biomedical Waste authorisation और authorised treatment facility से linkage या नियमों के अनुरूप approved in-house treatment व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

बायोमेडिकल वेस्ट की होगी डिजिटल ट्रैकिंग
अदालत ने Biomedical Waste Management Chain को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए bar-coding और digital traceability व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है।
इसका उद्देश्य बायोमेडिकल वेस्ट की पूरी यात्रा को—
अस्पताल → संग्रह → परिवहन → उपचार → अंतिम निपटान
तक track करना है।
अनधिकृत वाहन और थर्ड पार्टी पर रोक
Biomedical Waste का collection और transportation authorised CBMWTF operator के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए केवल authorised vehicles का इस्तेमाल होगा।
किसी अनधिकृत third party को Biomedical Waste के collection या transportation की अनुमति नहीं होगी। इसकी compliance की जांच JSPCB करेगा।
नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर हो सकती है कार्रवाई
JSPCB को Healthcare Facilities और Common Biomedical Waste Treatment Facilities की नियमित और surprise inspections करनी होंगी।
लगातार उल्लंघन पाए जाने पर कानून के अनुसार:
- authorisation suspend करना
- facility closure
- environmental compensation
- prosecution
जैसी कार्रवाई की जा सकती है। JSPCB को inspections, notices और enforcement actions का उचित रिकॉर्ड भी रखना होगा।
जनता के लिए बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड
पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के लिए JSPCB को publicly accessible digital dashboard विकसित करना होगा।
इसमें जिला-वार:
- compliance status
- inspections
- enforcement actions
की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
शिकायतों के लिए ऑनलाइन ग्रिवांस मैकेनिज्म
JSPCB को accessible grievance redressal mechanism और online portal की व्यवस्था करनी होगी। प्राप्त शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
इससे नागरिक बायोमेडिकल वेस्ट से संबंधित समस्या या संभावित उल्लंघन की जानकारी संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचा सकेंगे।
CBMWTF की तीन महीने में विशेष जांच
JSPCB को Common Bio-Medical Waste Treatment Facilities की विशेष जांच करनी होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कोई facility अपनी authorised jurisdiction के बाहर तो काम नहीं कर रही और बिना वास्तविक treatment किए disposal certificate तो जारी नहीं कर रही।
इस विशेष verification को तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
Health Department को करनी होगी ट्रेनिंग और जागरूकता
State Health Department को JSPCB के साथ समन्वय कर Healthcare Facilities और Biomedical Waste Operators के लिए:
- periodic training
- awareness programme
- capacity-building programme
चलाने होंगे।
Environmental Clearance में SEIAA की भूमिका
जहां Common Bio-Medical Waste Treatment Facility की स्थापना या विस्तार के लिए Environmental Clearance आवश्यक है, वहां SEIAA को JSPCB के साथ consultation करते हुए Bio-Medical Waste Management Rules, 2016 और संबंधित environmental guidelines के अनुरूप प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी।
Article 21 से जुड़ा बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का मामला
इस आदेश का महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू यह है कि अदालत ने Biomedical Waste Management को संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के अधिकार से जोड़ा है।
आदेश से जुड़े विवरण के अनुसार, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण में जीवन के अधिकार को Article 21 के संरक्षण से जोड़ा गया है। बायोमेडिकल वेस्ट के अनुचित प्रबंधन से संक्रमण, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
2012 से चल रही थी न्यायिक प्रक्रिया
यह मामला वर्ष 2012 से न्यायालय के समक्ष चल रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, न्यायालय ने संबंधित statutory authorities की ओर से लंबे समय तक प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने में रही कमियों, विभागों के बीच coordination की कमी, धीमी कार्रवाई और enforcement में कमी को रिकॉर्ड पर लिया है।
अदालत की कार्यवाही के इस क्रम में यह बात सामने आती है कि केवल नियम और कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों और statutory authorities को उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना होगा।
अब किस स्तर पर किसकी जिम्मेदारी?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन में विभिन्न स्तरों की जिम्मेदारी इस प्रकार निर्धारित की गई है:
अस्पताल स्तर पर
- 30 से अधिक बेड — Biomedical Waste Management Committee
- 30 या उससे कम बेड — Nodal Officer
जिला स्तर पर
- DC/DM — समन्वय, समीक्षा और सामान्य कचरे में Biomedical Waste के मिश्रण पर रोक
- Civil Surgeon + JSPCB + Urban Local Body — संयुक्त समीक्षा
- District Monitoring Committee — निगरानी
राज्य स्तर पर
- Secretary स्तर का State Nodal Officer
- विभागों के बीच समन्वय
- State-wide Gap Analysis
Regulatory स्तर पर
- JSPCB — authorisation, inspection, tracking, enforcement, dashboard और grievance mechanism
Treatment Facility स्तर पर
- authorised jurisdiction में कार्य
- वास्तविक treatment के बाद ही disposal certification।
JHRC ने कहा- अब जनता के बीच से बनेगी निगरानी टीम
JHRC के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि Biomedical Waste Management का मुद्दा आम नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षित पर्यावरण से सीधे जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि 14 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाई कोर्ट ने विभिन्न विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित की है। उनके अनुसार, अब पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए जल्द ही जनता के बीच से एक निगरानी टीम का गठन किया जाएगा, जो यह देखेगी कि हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन सही ढंग से हो रहा है या नहीं।
मनोज मिश्रा ने कहा कि यदि मामले में किसी भी स्तर पर कोताही पाई गई तो आंदोलन के साथ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इसे मानवाधिकार संगठन की लड़ाई के बजाय जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय बताया।
ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में मनोज मिश्रा के साथ किशोर वर्मा, सलावत महतो, आरसी प्रधान, रेणु सिंह, जगन्नाथ मोहंथी, देवशीष दास, शिशिर डे, गुरूमुख सिंह, अभिजीत चंदा, एसके बासु, बी. राम, स्नेहा चंद्रवंशी, तरुण देवी सहित कई सदस्य मौजूद थे।
