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Minister Deepak Prakash Row: सुप्रीम कोर्ट का बिहार सरकार से बड़ा सवाल- अब तक मंत्री कैसे बने हुए हैं दीपक प्रकाश?
Minister Deepak Prakash Row: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे, दीपक प्रकाश की मंत्रीपद पर स्थिति अब संकट में दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी सदन का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री रहने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार सरकार से स्पष्ट सवाल किया है कि जब दीपक प्रकाश अब तक विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बने हैं, तो ऐसा कैसे संभव है कि वे मंत्री पद पर बने रहें।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह साफ किया कि यह प्रश्न संविधान एवं कानून से संबंधित है। राज्य सरकार को ये स्पष्ट करना होगा कि बिना चुनाव में चुने गए व्यक्ति का मंत्री पद पर रहना कैसे सही है, जबकि छह महीने की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है।
मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित
सरकार के वकील ने अदालत में बताया कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है, और अदालत के किसी भी आदेश का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
दीपक प्रकाश को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया। उस समय न तो वे विधायक थे और न ही उन्होंने चुनाव में भाग लिया था। रालोसपा के चार विधायकों के बावजूद, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनाने में सफल रहे।
बाद में, जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने, तब दीपक प्रकाश को उसी विभाग की जिम्मेदारी फिर से दी गई। इस तरह, दो बार मंत्री पद की शपथ लेने के बावजूद, वे बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन सके।
6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी गैर-विधायक व्यक्त को मंत्री बनने के 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है। दीपक प्रकाश के मामले में यह तय की गई समय सीमा समाप्त हो चुकी है। 27 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे बिहार की निगाहें हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके राजनीतिक भविष्य और मंत्री पद की स्थिति को निर्धारित करेगा।
