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Muzaffarpur Major Accidentr: अस्पताल में लगी आग, 5 मरीजों की जान गई; 20 से ज्यादा झुलसे

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Muzaffarpur Major Accidentr: मुजफ्फरपुर में गुरुवार सुबह एक गंभीर घटना घटी। ब्रह्मपुरा क्षेत्र स्थित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ में अचानक भयंकर आग लग गई। यह आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर मौजूद आईसीयू वार्ड में शुरू हुई, जो तुरंत ही विकराल रूप धारण कर गई।

आग के परिणामस्वरूप पूरे अस्पताल में घना धुआं फैल गया, जिससे वहां मौजूद मरीजों और उनके परिवार वालों में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

पांच लोगों की मौत की पुष्टि

इस दुखद घटना में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को सुरक्षित निकालकर अन्य अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

इन मरीजों का निधन हुआ है:

  • शशांक कुमार, औराई, मुजफ्फरपुर
  • गीता देवी, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर
  • उदय कुमार, तरियानी, शिवहर
  • कृष्ण नंदन
  • चंचला कुमारी

उदय कुमार, जो कि विशंभरपुर, शिवहर के निवासी थे, चार दिन से अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में रखा गया था। उनकी पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम और बेटी आकांक्षा अस्पताल में उनके साथ थीं। उनके साले नीतीश भी मौजूद थे। जब शोर हुआ, तो सभी को घटना की जानकारी मिली, लेकिन जब तक वे वहां पहुंचे, तब तक उदय कुमार का निधन हो चुका था।

अग्निशामक टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया

दिस्तौलिया की निवासी गीता देवी को एक जून को भर्ती कराया गया। वे शुगर और उच्च रक्तचाप से प्रभावित थीं और उनका डायलिसिस चल रहा था। यह जानकारी उनके बेटे अनीश ठाकुर ने साझा की।

गोरिगमा डीह, मीनापुर के निवासी कृष्णनंदन सिंह डॉ. संजीव के उपचाराधीन थे, जहाँ उन्हें फेफड़ों में पानी आ जाने की समस्या थी। वे 22 मई से अस्पताल में भर्ती थे।

मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर निकालना पड़ा

जैसे ही घटना की सूचना प्राप्त हुई, दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंची। अग्निशामक टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, ताकि अस्पताल के विभिन्न वार्डों में फंसे मरीजों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सके।

आईसीयू में भर्ती मरीजों को बचाने के लिए राहत और बचाव टीम को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। देखते ही देखते जहर भरा धुआं पूरे अस्पताल में फैल गया, जिससे कई मरीजों का स्वास्थ्य और खराब हो गया। कई मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर निकालना पड़ा। इसके बाद, उन्हें निकटवर्ती सुरक्षित अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।

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