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NEET Paper Leak का पूरा सच: सुरक्षित कमरे से बाहर कैसे पहुंचा पेपर? CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा
NEET Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्र ने परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की गोपनीय प्रक्रिया में हुई सुरक्षा खामियों को उजागर किया है। जांच एजेंसी का मानना है कि एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ लीक का मुख्य कारण बने हैं।
इसमें रसायन विज्ञान के प्रो. पीवी कुलकर्णी, वनस्पति विज्ञान एवं प्राणि विज्ञान (जूलाजी) की प्रो. मनीषा गुरुनाथ मांधरे और भौतिकी की प्रो. मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान प्राप्त गोपनीय जानकारी को उजागर किया। सीबीआई का कहना है कि ये तीनों विशेषज्ञ काम खत्म होने के बाद पुणे लौटकर प्रतियोगियों को विशेष कोचिंग देते थे, जबकि एनटीए के नियमों के अनुसार, विशेषज्ञों को ऐसी कोचिंग देने की अनुमति नहीं थी।
सीबीआई के अनुसार, प्रश्नपत्र की सेटिंग, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन का कार्य एनटीए के ओखला स्थित परिसर में एक सुरक्षित वातावरण में किया गया था। लेकिन, इसके बावजूद विशेषज्ञों के प्रवेश और निकास के समय किसी प्रकार की तलाशी या शारीरिक जाँच (फ्रिस्किंग) की व्यवस्था मौजूद नहीं थी। एजेंसी ने यह भी बताया कि एनटीए कार्यालय में विशेषज्ञों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई समर्पित लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं था।
“फीफा वर्ल्ड कप 2026” नामक एक वाट्सएप ग्रुप बनाया
सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में यह भी उल्लेख किया है कि परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामले की साजिश के तहत आरोपियों ने “फीफा वर्ल्ड कप 2026” नामक एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था। पुणे में स्थित आरोपियों ने जीव विज्ञान की विशेष कक्षाओं और परीक्षा के बाद मूल्यांकन पर चर्चा करने के लिए इस ग्रुप का गठन किया था।
सीबीआई ने अभ्यर्थियों और बिचौलियों से मिली सामग्री की जांच करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ समिति से संज्ञान लिया। इस समिति के मुताबिक, जो लीक हुई सामग्री पाई गई, उसका अधिकांश भाग नीट-यूजी 2026 के कैलाश, शिवालिक, सेट-दो और सेट-तीन के प्रश्नपत्रों से संबंधित था। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन प्रश्न सेटों का विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया, उनमें 85 प्रतिशत तक प्रश्नों का मिलान पाया गया। इसके विपरीत, जिन सेटों को विशेषज्ञों ने नहीं देखा, उनमें प्रश्नों का मेल कम था।
सीबीआई ने तीनों विशेषज्ञों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 316(5), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, तथा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इन धाराओं में प्रभावित व्यक्तियों के लिए उम्रकैद की सजा और लोक परीक्षा कानून के तहत कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। हालाँकि, इन आरोपों को अदालत में अभी साबित होना बाकी है।
135 प्रश्नों और विकल्प जवाबों को छोटे-छोटे चिट पर
चार्जशीट के मुताबिक, गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों को रफ वर्क के लिए साधारण कागज दिए जाते थे। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि केमिस्ट्री विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने इस सुविधा का दुरुपयोग किया। उन्होंने केमिस्ट्री के 135 प्रश्नों और विकल्प जवाबों को छोटे-छोटे चिट पर संक्षेप में लिख लिया और उन्हें छिपाकर बाहर ले गए।
यह भी कहा गया है कि कुलकर्णी सरल प्रश्नों को याद कर लेते थे और दिन का काम खत्म होने के बाद होटल लौटकर उन्हें फिर से लिखते थे। वह तीन सेटों के बैक-ट्रांसलेशन का काम भी संभाल रहे थे। सीबीआई के अनुसार, बाद में मिली लीक की गई सामग्रियों में केमिस्ट्री के प्रश्नों का प्रमुख मेल उन्हीं सेटों से पाया गया, जिन तक कुलकर्णी की पहुंच थी।
मनीषा गुरुनाथ मांधरे वनस्पति विज्ञान और प्राणि विज्ञान (जूलाजी) में अंग्रेजी से मराठी में अनुवाद करने और बैक-ट्रांसलेशन के कार्य से जुड़ी थीं। सीबीआई के अनुसार, काम खत्म करने के बाद वह होटल लौटकर एनसीईआरटी की किताबों में संबंधित पैराग्राफ को चिन्हित किया करती थीं।
जांच एजेंसी का कहना
जांच एजेंसी का कहना है कि उनके लंबे अनुभव के कारण वह प्रश्नों को एनसीईआरटी की सामग्री से आसानी से जोड़ सकती थीं। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से उन्होंने परीक्षा के लिए तैयार किए जा रहे प्रश्नों की सामग्री को पुनः तैयार करने में सहायता की।
फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार पर भी आरोप लगाया गया है कि वह रोजाना का काम समाप्त करने के बाद प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में लिखती थीं। सीबीआई का कहना है कि उन्होंने बाद में 16 पन्नों में 68 भौतिकी के प्रश्न एक अभ्यर्थी की मां को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसी ने जब्त की गई सामग्री की फोरेंसिक जांच भी कराई। सरकारी दस्तावेजों की जांच करने वाले परीक्षक की रिपोर्ट भी संपन्न हुई। 68 भौतिकी प्रश्नों की लिखावट को हवलदार और सह-आरोपित तेजस शाह से जोड़े जाने की बात कही गई है।
