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Nepal Flood Disaster: 300 भारतीयों समेत 1500 लापता, राहत-बचाव अभियान तेज
नेपाल में आई बाढ़ के बाद अब बिहार पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। वाल्मीकिनगर के गंडक बराज से पानी काफी तेजी से छोड़ा जा रहा है। 26 अगस्त की रात 11 बजे से 12 बजे के बीच बराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़कर 1,50,200 क्यूसेक पहुंच गया। इस दौरान बराज के ऊपर यानी अपस्ट्रीम पर जलस्तर 355 फीट और नीचे यानी डाउनस्ट्रीम पर 352.60 फीट रिकॉर्ड किया गया।नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी में आई भोटेकोशी बाढ़ को लेकर नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि अब तक 165 शव मिले हैं, और उनकी पहचान की जा रही है।
1,500 लोग लापता हैं, जिनमें 800 विदेशी
अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके से करीब 1,500 लोग लापता हैं, जिनमें 800 विदेशी भी शामिल हैं। नेपाल में राहतकर्मी लगातार हेलीकॉप्टर से फंसे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं और जरूरी सामान भी पहुंचा रहे हैं। हजारों लोग बुधवार की इस आपदा में फंसे थे, जिन्हें निकालने के लिए लगातार कोशिशें चल रही हैं।यह आपदा तिब्बत के ल्हासा को काठमांडू से जोड़ने वाले उस पथरीले पहाड़ी रास्ते पर आई, जहाँ हर साल भारी तादाद में ट्रेकर्स और तीर्थयात्री आते-जाते हैं। पुलिस ने अंदेशा जताया है कि मरने वालों की तादाद 165 से भी ज्यादा हो सकती है।
आंकड़ा अभी और बढ़ेगा
पुलिस प्रवक्ता एबी नारायण काफ्ले ने रॉयटर्स से कहा, “यह आंकड़ा अभी और बढ़ेगा, क्योंकि तलाशी अभियान दोबारा शुरू हो चुका है और और शव मिलने की उम्मीद है।” पुलिस और पर्यटन विभाग के मुताबिक, नेपाल में जो 826 लोग लापता हैं, उनमें से करीब 600 लोग विदेशी हैं।दो दर्जन से ज्यादा देशों के लापता पर्यटकों में करीब 300 भारत से, 63 अमेरिका से, 34 ऑस्ट्रेलिया से, 33 ब्रिटेन से और 25 कनाडा से थे। चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी ने गुरुवार को बताया कि तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में लापता लोगों की कुल संख्या 558 है, जिनमें से 260 विदेशी नागरिक हैं।
पानी और मलबे का जबरदस्त बहाव
चश्मदीदों ने क्या देखा? जिस वीडियो की पुष्टि हो चुकी है, उसमें आपको नजर आता है — पानी और मलबे का जबरदस्त बहाव ग्यिरोंग की बॉर्डर क्रॉसिंग पर दर्जनों लोगों को अपनी चपेट में लेता है। उधर नेपाल में हालात और भी खराब हैं। वहां कई घर, सड़कें और बिजली की परियोजनाएं बह गईं। अस्पताल में भर्ती 68 साल के केशव प्रसाद बराल ने कहा, “कीचड़ का तेज बहाव सीधे हमारी तरफ बढ़ रहा था। जैसे-जैसे वो करीब आया, उसकी ऊंचाई भी बढ़ती गई। मैंने देखा कि कीचड़ घर में घुस आया है, तो झट से अपनी पत्नी का हाथ पकड़ा और उसे छत पर ले जाने लगा, मगर वो कीचड़ में बह गई।”
करीब चार घंटे बाद एक हेलीकॉप्टर आया
करीब चार घंटे बाद एक हेलीकॉप्टर आया और मुझे वहां से सुरक्षित निकाल लिया। केशव ने दुख में कहा, “मेरी पत्नी अब भी कहीं उसी कीचड़ के नीचे दबी हुई है। अब वो नहीं रही।”
वहीं, एक दूसरे बचे व्यक्ति ने बताया कि उसने आम के पेड़ की टहनी को कसकर पकड़ लिया था—यही उसकी जान बच गई। उस वक्त वो देख रहा था कि उसके सामने वाला घर, जिसमें वो काम करता था, पूरा ही बह गया।
