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Patna Safai Workers Strike End: वेतन और बोनस सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाएंगे
Patna Safai Workers Strike End: पटना में नगर निकाय के सफाई कर्मियों की छह दिन से चल रही हड़ताल अब समाप्त हो गई है। यह निर्णय एक समझौते के बाद लिया गया, जिसमें सफाईकर्मी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी व्यक्त की। इस बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त, यशपाल मीणा, भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने जानकारी दी कि राज्य सरकार नगर निकायों के सफाई कर्मियों के कल्याण के प्रति गंभीर है। उन्होंने बताया कि अब दैनिक कर्मियों को अवकाश, ग्रेच्युटी, और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसे लाभ प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह अन्य सेवा लाभ दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
सफाईकर्मियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा
बैठक में तय किया गया कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे सफाई कर्मियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्हें पहली बार बोनस का लाभ भी दिया जाएगा। एजेंसियों को उनके निर्धारित कमीशन का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा, काम के दौरान वाहनों के खराब होने की स्थिति में चालकों का वेतन काटे जाने की व्यवस्था को तुरंत समाप्त कर दिया गया है।
सशक्त स्थायी समिति की विशेष बैठक में सफाई कर्मियों की मांगों को मंजूरी देकर संबंधित विभाग को भेजने की सिफारिश की गई है। पटना नगर निगम में कार्यरत 3816 दैनिक कर्मियों के स्थायीकरण के प्रस्ताव को लागू करने से हर महीने लगभग 13.66 करोड़ रुपये वेतन में खर्च होंगे। प्रत्येक कर्मी का प्रस्तावित मासिक वेतन 35,800 रुपये निर्धारित किया गया है। वर्तमान में, दैनिक पारिश्रमिक पर इन कर्मियों का खर्च 6.04 करोड़ रुपये प्रति माह हो रहा है। इस प्रकार, स्थायीकरण लागू होने पर नगर निगम पर 7.61 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।य भार पड़ेगा. इसका वार्षिक खर्च करीब 163.94 करोड़ रुपये बैठेगा.
कहां कितने सफाईकर्मी
निगम के आठ कार्यालयों और अंचलों में कुल 3816 दैनिक कर्मी सक्रिय हैं। इनमें नूतन राजधानी अंचल में सबसे ज्यादा, यानी 941 कर्मी कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, पाटलिपुत्र अंचल में 700, अजीमाबाद में 585, बांकीपुर में 513, कंकड़बाग में 426, पटना सिटी में 405, जलापूर्ति अंचल में 199, और मुख्यालय में 47 कर्मी कार्य कर रहे हैं।
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि कई मांगों पर सहमति बन चुकी है, जबकि कुछ अन्य मांगों पर विचार हेतु एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया है। तीसरी मांग के संदर्भ में, एसीपी/एमएससीपी योजना के लाभ पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए पत्राचार करने तथा प्रतिबंध हटने पर बाकी बचे कर्मचारियों को इसका लाभ देने पर सहमति बनी है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने यह भी बताया कि शहर की साफ-सफाई को बनाए रखने के लिए सफाई कर्मचारियों का लौटना अत्यंत आवश्यक है।
हड़ताल का प्रभाव शहर की सड़कों और गलियों में
हड़ताल का प्रभाव शहर की सड़कों और गलियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। कई क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लगे हुए थे, जिससे स्थानीय निवासियों को तीव्र गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा था। आम जनता की तकलीफें बढ़ती जा रही थीं और नगर निगम पर परिस्थिति सुधारने का दबाव भी बढ़ता जा रहा था।
इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए, निगम प्रशासन ने तत्परता दिखाई और एक बैठक आयोजित की, जहां उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कर पाना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इनमें वेतन संबंधी समस्याएं, सेवा शर्तों में सुधार और काम के दौरान मिलने वाली सुविधाएं शामिल थीं। सफाईकर्मी यह शिकायत कर रहे थे कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है और सुरक्षा उपकरणों की भी कमी महसूस हो रही है।
किन मांगों पर बनी सहमति
पहली मांग के अनुसार, दैनिक और संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतनमान का समायोजन किया जाएगा और उनकी सेवा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरी मांग में यह तय किया गया है कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों का वेतन अब किसी बिचौलिए के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।
तीसरी मांग में एसीपी और एमएससीपी योजना से संबंधित रोक हटाने पर सहमति बनी है। जैसे ही रोक हटेगी, पात्र कर्मचारियों को योजना का लाभ देने का निर्णय भी लिया जाएगा।
सशक्त स्थायी समिति ने इन मांगों को उचित मानते हुए सर्वसम्मति से स्वीकृति दी। सभी बिंदुओं को प्रस्ताव के रूप में विभाग के पास भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
