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समय का चक्का घूम रहा है – डॉ. योगेंद्र

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कल चाय की दूकान पर महाभारत हो गया।
लत्तम- जुत्तम की नौबत आ गई। हुआ यह कि खियालीराम और राष्ट्रवादी भिड़ गये।
राष्ट्रवादी बहुत देर से बकर- बकर कर रहा था। बकर – बकर करता और अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहता-“ कुछ भी कहो भाय। देश की लड़कियां एकदम बदतमीज़ हो गईं हैं। ऐसी ऐसी गालियाँ, हमारे प्रधानमंत्री को दीं। प्रधानमंत्री तो महामानव हैं जो सह गये। मुझे देती तो गला उतार लेते।”

राष्ट्रवादी सचमुच अगियाबैताल हो रहे थे। माथे का टीका और देह पर गेरूआ चादर भी फड़कने लगे थे।
खियालीराम चुपचाप चाय पी रहा था। आजकल वह चुप्पे रहना चाहता है। मगर राष्ट्रवादी रूक नहीं रहा था। बार बार एक ही बात एक- दो बार कहता तो खियालीराम बर्दाश्त कर लेता, लेकिन घूमा- फिरा कर वही बात और अंत में यह चिपका देता – देश की लड़कियां बदतमीज़ हो गई हैं।

खियालीराम के धैर्य की सीमा चुक गई। राष्ट्रवादी भाई से पूछ ही लिया – “ देश की लड़कियां कैसे बदतमीज़ हो गईं हैं?” राष्ट्रवादी चाय सुडकने के लिए मुँह से ग्लास लगाने को तैयार ही हो रहा था कि यह प्रश्न सुनकर चौंका। उसने उत्तर देने के बजाय खियालीराम से पूछ लिया – “ आप किस देश में रहते हैं?” “इसी देश में जहाँ तुम रहते हो?” खियालीराम ने जवाब दिया।

राष्ट्रवादी को लगा कि यह आदमी टेढ़ियल है। उसने एक दूसरा प्रश्न दाग़ दिया-“ तुम सनातनी हो?” “हाँ, सौ कैरेट। मेरा पूरा कुल – ख़ानदान सनातनी हैं। मेरा बाप, मेरी माँ, मेरे बाप का बाप- सब सनातनी।” खियालीराम ने उत्तर दिया। “लगता नहीं है ।सनातनी का कोई लक्षण तुम में नहीं है। तुम सनातनी हो नहीं सकते।“ राष्ट्रवादी ने अपना निर्णय सुनाया। खियालीराम के तलवे में ग़ुस्से की लहर उठी। मगर पचा गया। उसने धैर्य बटोरा और कहा-“ सर्टिफ़िकेट बाँटना बंद करो। तुम मुद्दे पर आओ कि देश की लड़कियां कैसे बदतमीज़ हो गई हैं?”

“अरे सुना नहीं तुमने, प्रधानमंत्री को देश भर में कैसी कैसी गालियाँ लड़कियां दे रही हैं?“ “लड़कियां क्या आसमान से टपकती हैं? जो उन्हें सिखाते हो, वही वे उगलती हैं। तुम बीजेपी के आई टी सेल के गालीबाज अमित मालवीय को जानते हो? दिन रात विपक्षी नेताओं को गालियाँ ही देता है। तुमने कभी उसे मना किया? उल्टे उसकी गालियों पर तालियाँ बजाते रहे। और प्रधानमंत्री जिन्हें महामानव कहते हो, उन्होंने भरे मंचों से गालियाँ नहीं दी? तब तो फर्जी सनातनी लोग तालियाँ पीटते थे। अब बुरा क्यों लगता है? जो बोओगे, वही न काटोगे।”

राष्ट्रवादी यह सब सुनने का आदी नहीं था। उसने बकथोथरी की-“ प्रधानमंत्री आख़िर प्रधानमंत्री होते हैं।उनको माँ लगाकर गाली दी गई।” “प्रधानमंत्री की माँ माँ होती है, आम लोगों की मां माँ नहीं होती? राहुल गांधी की माँ को ‘ जर्सी गाय’, ‘कांग्रेस की विधवा’ और ‘बार बाला’ कहा गया। और इसी आंदोलन में अमित मालवीय की आर्मी ने लड़कियों के लिए गंदे गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया और तब लड़कियों का कांउटर अटैक शुरू हुआ। प्ले कार्ड्स और इंस्टाग्राम के ज़रिए। “
राष्ट्रवादी को यह सब अखर गया। उसने कहा- “ हमारे प्रधानमंत्री श्रीकृष्ण हैं।

वे सौ गालियों तक चुप रहेंगे। इसके बाद उनका सुदर्शन चलेगा।” “भाई साहब, गालियों का बिज़नेस बंद करो। अगर गाली देते हो तो गाली सुनने की तैयारी रखो। समाज में जो बाँटोगे, एक दिन लौट कर तुम्हारे पास आयेगा। तुम उस समाज में रहते हो, जहाँ पूरी की पूरी जाति को गाली बना देते हो। चमार, चूहडा, भंगी, चांडाल आदि क्या है? चमार या चूहडा आदमी नहीं है? तुमने गाली बना दिया। तुमने कभी इस पर अफ़सोस किया ?“

अपना तर्क कटते और जाति का ज़िक्र होते ही राष्ट्रवादी चरित्र- भंजन पर उतर आया। नाक फोकरा कहा-“ तुम गद्दार हो। तुम्हारे जैसे लोगों के कारण ही यह देश विश्वगुरु नहीं बन सका। “उसकी बात पूरी होती कि खियालीराम की आँखें भी चढ़ गई। वह राष्ट्रवादी की ओर लपका। गद्दार शब्द से वह आहत हो गया था। वह तो चाय वाला था जो बीच में आ गया, वरना कल जय या क्षय हो ही जाता।

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