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चांडिल डैम विस्थापितों की संवाद यात्रा पूरी, 116 गांव और 13 पुनर्वास स्थलों तक पहुंचा समन्वय मंच

चांडिल डैम विस्थापितों
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चांडिल, 12 सितंबर 2026। चांडिल डैम विस्थापितों की समस्याओं, अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच की ओर से आयोजित संवाद यात्रा का शनिवार को नीमडीह प्रखंड के गुंडा पंचायत अंतर्गत सीमा गांव में समापन हुआ। समापन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और विस्थापितों के अधिकारों के लिए सामूहिक संघर्ष का संकल्प लिया।

मंच के अनुसार, संवाद यात्रा दो चरणों में आयोजित की गई। पहले चरण में 25 से 27 अगस्त तक ग्रामीणों से संवाद किया गया, जबकि दूसरे चरण में 7 से 12 सितंबर तक चांडिल डैम से प्रभावित 116 विस्थापित गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों तक पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं।

भूमि, मुआवजा और रोजगार सहित कई मुद्दों पर संवाद

संवाद यात्रा के दौरान विस्थापित परिवारों की भूमि, मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, विकास और अन्य लंबित समस्याओं को लेकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया गया। मंच के सदस्यों ने गांव-गांव जाकर विस्थापित परिवारों की समस्याओं और सुझावों को समझने का प्रयास किया।

मंच का कहना है कि संवाद यात्रा का उद्देश्य केवल गांवों का दौरा करना नहीं था, बल्कि विस्थापित समाज की वास्तविक समस्याओं को समझकर सामूहिक संघर्ष की दिशा तय करना भी था।

सीमा गांव में सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी

संवाद यात्रा के अंतिम पड़ाव सीमा गांव में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंच के सदस्य राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल डैम विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि वे विस्थापितों के हित और अधिकार के लिए अंतिम समय तक संघर्ष करते रहेंगे। उनके अनुसार, विस्थापितों की समस्याओं का समाधान सामूहिक एकजुटता और लगातार संघर्ष से ही संभव है।

अंबिका यादव ने एकजुटता का किया आह्वान

मंच के सदस्य अंबिका यादव ने ग्रामीणों से संगठित रहने और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की सबसे बड़ी ताकत उनकी एकता है।

उन्होंने ग्रामीणों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि विस्थापितों की जायज मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

ग्रामीणों से खुद आगे आने की अपील

मंच के सदस्य श्यामल माडीं ने कहा कि अब तक अलग-अलग गांवों के विस्थापित अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में गांव की समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों को स्वयं आगे आने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण आगे आएंगे तो उनकी समस्याओं की लड़ाई में विस्थापित समन्वय मंच उनके साथ खड़ा रहेगा।

116 गांव और 13 पुनर्वास स्थलों की समस्याएं होंगी एकजुट

मंच के सदस्य नारायण गोप ने कहा कि संवाद यात्रा के दौरान 116 विस्थापित गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों तक पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया गया है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी आने वाले संघर्ष को मजबूती प्रदान करेगी। मंच का उद्देश्य अलग-अलग गांवों की समस्याओं को एक साथ रखते हुए विस्थापितों की सामूहिक मांगों को मजबूती से उठाना है।

अब आंदोलन की अगली रणनीति होगी तैयार

संवाद यात्रा के दोनों चरण पूरे होने के बाद अब मंच की ओर से ग्रामीणों से मिली समस्याओं और सुझावों को संकलित किया जाएगा। इसके बाद विस्थापितों की सामूहिक मांगों और आगामी आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप देने की बात कही गई है।

समापन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव मंच के सामने रखे। ग्रामीणों ने विस्थापितों के अधिकारों की सामूहिक लड़ाई में सहयोग और भागीदारी का भरोसा दिलाया।

मंच की ओर से कहा गया कि अब अलग-अलग गांवों की अलग-अलग आवाज के बजाय 116 गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों की एकजुट आवाज एक मंच से उठाई जाएगी।

ये लोग रहे मौजूद

संवाद यात्रा के समापन कार्यक्रम में सीमा गांव के अनुपम महतो, शिवचरण महतो, गणेश मंडल, अनूप महतो, तरनी सेन महतो, नरसिंह दास, सुशेन महतो, सुभद्रा महतो, अंजना दास, पार्वती महतो और अंगूरी महतो, नीलमणि माहली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

वहीं मंच की ओर से राकेश रंजन महतो, शैलेंद्र महतो, सागर महतो, श्यामल मार्डी, अंबिका यादव और नारायण गोप समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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