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Youth Protest Indian Politics: सड़कों की हलचल क्या नया गुल खिलाएगी? युवाओं के उभार और बदलती राजनीति पर डॉ. योगेन्द्र की टिप्पणी

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नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों युवाओं की बढ़ती सक्रियता और सड़कों पर दिखाई दे रही हलचल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामाजिक चिंतक डॉ. योगेन्द्र ने अपने एक लेख में इस उभरते राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश में एक नए दौर की आहट महसूस की जा सकती है।

डॉ. योगेन्द्र ने अपने लेख में दो घटनाओं का उल्लेख किया है। पहली घटना कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़ी है। उन्होंने राहुल गांधी के लगातार देशभर में भ्रमण, लोगों से संवाद और आलोचनाओं के बावजूद सक्रिय बने रहने को राजनीतिक साहस का उदाहरण बताया है।

लेख में कहा गया है कि राहुल गांधी ने तमाम राजनीतिक हमलों और आलोचनाओं के बावजूद जनता के बीच रहकर अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखी है। डॉ. योगेन्द्र के अनुसार, आलोचनाओं का सामना करते हुए मैदान में डटे रहना किसी भी नेता के भीतर मौजूद नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

दूसरी ओर, उन्होंने अमेरिका से भारत आ रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके समर्थकों द्वारा युवाओं को संगठित करने की कोशिशों का भी जिक्र किया है। लेख में दावा किया गया है कि युवाओं के आह्वान के चलते दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं और प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है।

युवाओं की नाराजगी और सरकार पर सवाल

डॉ. योगेन्द्र का मानना है कि देश का एक बड़ा युवा वर्ग रोजगार, शिक्षा और अवसरों को लेकर असंतोष महसूस कर रहा है। उनके अनुसार, युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा करने में केंद्र सरकार अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी है।

उन्होंने लिखा है कि लोकतंत्र में युवा शक्ति की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। यदि युवा संगठित होकर अपनी बात रखने के लिए आगे आते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। हालांकि उन्होंने युवाओं को संयम और स्पष्ट वैचारिक दिशा बनाए रखने की भी सलाह दी है।

आंदोलन और राजनीतिक प्रयोगों पर सतर्क रहने की जरूरत

लेख में यह भी कहा गया है कि इतिहास में कई राजनीतिक आंदोलनों की शुरुआत अलग उद्देश्य से हुई, लेकिन समय के साथ उन्होंने नई दिशा ग्रहण की। इसी संदर्भ में कांग्रेस के गठन का उदाहरण भी दिया गया है।

डॉ. योगेन्द्र का कहना है कि युवाओं के किसी भी उभार को खुले मन से देखना चाहिए, लेकिन उसके पीछे मौजूद राजनीतिक रणनीतियों और उद्देश्यों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

लोकतंत्र में सड़क की भूमिका

लेख के अंत में उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि जनता की भागीदारी, संवाद और सामाजिक आंदोलनों से भी उसकी दिशा तय होती है। उनके अनुसार, आने वाले समय में युवाओं की भूमिका भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

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