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सात दिनों के बाद रांची और देश: राहुल गांधी, चुनाव आयोग और सरकार पर डॉ. योगेन्द्र की टिप्पणी

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सात दिनों के बाद रांची

सात दिनों के बाद जब रांची स्टेशन पर उतरा तो धूप खिली थी। गर्मी थी, लेकिन हवा नरम थी। आकाश में कहीं बादल का टुकड़ा नहीं था। नील गगन के तले रांची शहर था, गाड़ियॉं थीं और सड़कों पर सुबह का नज़ारा था। कहीं फल वालों के ठेले थे, तो कहीं कूड़े उठाने वाली नगर निगम का ट्रैक्टर था। किसी दूकान में चाय तो कहीं छनती हुई जलेबियाँ। दुर्गापूजा की शोभा के लिए बाँस गाड़े गये थे।

आप जो शहर छोड़कर जाते हैं, आने के बाद वे रह नहीं जाते। सात दिनों में ही धान के पौधे पीले हो गये थे और बालियाँ झुक गईं थीं। शाम होते होते बादल भी आये और देर तक रह रह कर बरसा होती रही।

बारिश में ही पूरा परिवार मोहराबादी मैदान गया। वहां मेला लगा हुआ था और पौत्री आर्ची को एक कार्ड मिला था जिसमें फ्री कोल्ड ड्रिंक लिखा हुआ था। यह स्वाभाविक है कि आर्ची मेला जाने के लिए अतिरिक्त उत्साहित हो।

मेला अच्छा ख़ासा बड़ा था और उसमें प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति तीस रुपये चुकाने थे। टिकट काउंटर पर भी अच्छी खासी भीड़ थी। हम लोग अंदर गये। इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, चादर, बच्चों के खिलौने, सूखे फल के लिए कई अफ़ग़ानिस्तानी दूकानें, घरेलू सामान आदि तो थे ही, खाने पीने की दूकानें भी थीं। ऐसा लगता था कि हर सामान की क़ीमत बाहर के बाज़ार की तुलना में अधिक थी।

दिल्ली में सांसदों और पुलिस के बीच रस्साकशी

जिस समय हम लोग मेला देख रहे थे, उसी समय दिल्ली में सांसदों और पुलिस में रस्साकशी चल रही थी। चुनाव आयोग कार्यालय तक जाने में सांसदों को रोक दिया गया था। रास्ते में बैरिकेड लगा दिए गए थे और सभी तरह की पुलिस वहां खड़ी थी।

प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ गए और तिरंगा फहराया। अन्य सांसद भी बैरिकेड पर चढ़ने लगे। सभी सांसदों को पुलिस ने डिटेंन किया।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों वहां से निकल गए और आकाशवाणी परिसर में पहुँच गए। आकाशवाणी के बगल में चुनाव आयोग है। वहीं पर राहुल गांधी ने कहा कि देशद्रोहियों को छोड़ा नहीं जायेगा, चाहे नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह हों, मोहन भागवत हों या फिर ज्ञानेश कुमार हों।

फिर आकाशवाणी के एक पेड़ के नीचे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गए। देर रात तक बैठे रहे। फिर पुलिस ने उन्हें जबरन उठाया और बस में धकेल दिया। सांसद वेणुगोपाल को एक सिपाही ने ऐसे ठेला कि वे भूमि पर गिर पड़े।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकार पर सवाल

यह बात समझ से परे है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं तो मिलने देने में क्या दिक़्क़त है? ये सांसद हैं, कोई आतंकवादी तो हैं नहीं!

सरकार जितना दरवाज़ा बंद करेगी, जनता उतना ही उबलेगी। सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना और नारे लगाना आम बात है। इसमें कोई शक नहीं कि सरकार बहुत अभद्रता से पेश आ रही है।

राहुल गांधी को जिस तरह से पुलिस ने उठाया, उसे देश बरसों तक याद रखेगा।

नरेंद्र मोदी सरकार और मोहन भागवत पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कितने डरे हैं, पता नहीं, मोहन भागवत अपना डर छुपा नहीं पा रहे। वे हिन्दुओं को पुरानी पिच पर लाना चाहते हैं। वे कहने लगे हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार गई कि हिंदू धर्म खतरे में आ जायेगा।

लगता है कि हिन्दू धर्म का जन्म भी 2014 में हुआ है।

दरअसल ये लोग हिंदू धर्म की छाती पर मूँग दल रहे हैं और हिन्दू धर्म की अच्छाइयों को रौंद रहे हैं।

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