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Bihar Government Jobs: बिहार में सरकारी नौकरी को लेकर घमासान, डिग्री-डिप्लोमा धारक आमने-सामने

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Bihar Government Jobs: बिहार के अस्पतालों में फार्मासिस्ट की नौकरी को लेकर बीफार्म डिग्री धारक और डिप्लोमा फार्मासिस्ट एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं।

बीफार्मा धारक मंगलवार को प्रदेश में फार्मासिस्ट बहाली के लिए केंद्रीय भर्ती-पदोन्नति एवं सेवा विनियम-2025 के लागू होने की मांग करते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल पर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अनिश्चितकालीन अनशन पर रहने का निर्णय लिया।

दूसरी ओर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट संगठन की छात्र शाखा ने इस आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट और पटना हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना करार दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार से आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है।

उनका कहना है कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो वे भी सड़कों पर उतरेंगे। इससे फार्मासिस्ट पद पर नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर ताजा हो गया है।

बीफार्म डिग्रीधारियों को मौका दिया गया था

अनशन और धरने का नेतृत्व कर रहे अर्जेश राज ने कहा कि 1999 और 2006 की नियमित अवसरों के साथ-साथ 2013 और 2016 की संविदा भर्तियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। में बीफार्म डिग्रीधारियों को मौका दिया गया था।

स्वास्थ्य विभाग ने 2024 में नियमावली में संशोधित कर अस्पतालों में फार्मासिस्ट नियुक्ति से बीफार्म को बाहर किया, इससे प्रदेश के लगभग 25 हजार बीफार्म फार्मासिस्ट

इस कारण 1600 पद खाली रह गए हैं। दिव्यांशु राज, विमल कुमार, रवि रंजन कुमार, जयकरण कुमार और अभिमन्यु कश्यप ने प्रदेश में केंद्र की फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा नियमावली-2025 लागू करने की मांग की है।

उनका तर्क है कि देश में डी-फार्म कोर्स 2000 से बंद कर दिया गया है। कुछ राज्यों और रेलवे ने डी-फार्म को समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रदेश में बी-फार्म को बाहर कर दिया गया है।

बी-फार्मा डिग्री धारकों के आंदोलन का विरोध

बी-फार्म के लिए आरक्षित पदों पर डिप्लोमा फार्मासिस्टों को भी अवसर मिलने का समर्थन किया गया है। डिप्लोमा फार्मासिस्ट संगठन के छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बी-फार्मा डिग्री धारकों के आंदोलन का विरोध व्यक्त किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि फार्मासिस्ट पद की शैक्षणिक योग्यता के संबंध में पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की नियमावली में डिप्लोमा इन फार्मेसी को आवश्यक योग्यता बनाए रखने के मामले को सही ठहराया है।

मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, डीजीपी, डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर आंदोलनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील और पुनर्विचार याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। यदि कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर आंदोलन जारी रहा, तो डिप्लोमा धारक फार्मासिस्ट इसका विरोध करने के लिए सड़क पर उतरेंगे।

यदि वे अस्पतालों में फार्मासिस्ट के रूप में कार्य करना चाहते हैं, तो बी फार्मा डिग्रीधारियों को भी औषधि निरीक्षक, गवर्नमेंट एनालिस्ट और फार्मेसी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।

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