Sen your news articles to publish at [email protected]
Bihar Tender Scam में ED की बड़ी कार्रवाई, 7 IAS अधिकारियों को समन, प्रधान सचिव स्तर तक पहुंची जांच
Bihar Tender Scam: बिहार में हाल ही में सामने आए टेंडर घोटाले की जांच अब उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुँच गई है। यह मामला ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा, जिन्हें रिशु श्री के नाम से भी जाना जाता है, से संबंधित है। उनकी कंपनी रिलायबल इन्फ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड पर अरबों रुपये के टेंडर घोटाले और धन शोधन के आरोप लगाए गए हैं। पटना हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई को तीव्र कर दिया है।
इस क्रम में एजेंसी ने सात IAS अधिकारियों को समन भेजा है, जिनसे पूछताछ की जाएगी। इनमें एक अपर मुख्य सचिव, दो प्रधान सचिव और तीन सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिनमें से एक अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है। रिशु श्री के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में इन अधिकारियों के साथ उनकी chats भी प्राप्त हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, सचिव स्तर की एक महिला अधिकारी ने पहले ही ED के समक्ष अपना बयान पेश कर दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, संभवतः कुछ और अधिकारियों से भी पूछताछ होगी।
सात IAS अधिकारियों के नाम सामने आए
इडी की जांच में अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर सहित सात IAS अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। इन पर रिशु श्री के साथ संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी विभागों के टेंडर की महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी पहले से ही लीक कर दी जाती थी।
इस जानकारी का दुरुपयोग ठेके हासिल करने के लिए किया जाता था। आरोप है कि सरकारी ठेके रिशु श्री की कंपनी या उसके पसंदीदा ठेकेदारों को दिए जाते थे। टेंडर की शर्तें भी उनके फायदेमंद तरीके से अमल में लाई जाती थीं। इसके बदले में, वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत और वित्तीय लाभ देने की संभावना व्यक्त की गई है।
रिशु श्री टेंडर घोटाले की संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार है:
- मुख्य कंपनी: रिलायबल इन्फ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
- संचालक: रिशु रंजन सिन्हा, उर्फ रिशु श्री
- प्राथमिकी: वर्ष 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में दर्ज
- इडी के निशाने पर: अभिलाषा कुमारी शर्मा, योगेश कुमार सागर सहित सात IAS अधिकारी
- जेल भेजे गए अधिकारी: मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह
- चार्जशीट: जून 2026 में SVU ने सात मुख्य आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
- ताजा स्थिति: फोन के फोरेंसिक डेटा और चैट के आधार पर अधिकारियों से पूछताछ
2023 में यह मामला सामने आया था जब रिशु श्री से संबंधित प्राथमिकी पटना के रूपसपुर थाने में दर्ज की गई। इसके बाद विशेष निगरानी इकाई (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसकी जांच शुरू की।
जांच के दौरान ठेकेदार की डायरियों और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच की गई, जिससे कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं। इसके परिणामस्वरूप जांच का दायरा बढ़ा, और अब एजेंसियां कथित नेटवर्क से जुड़े प्रमुख अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
राज्य सरकार ने इस मामले में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को निलंबित किया है, जिनमें योगेश कुमार सागर (2017 बैच) और अभिलाषा कुमारी शर्मा (2014 बैच) शामिल हैं।
SVU ने तीन अन्य अधिकारियों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेजा है, जिनमें वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, मुख्य अभियंता तारिणी दास और कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं।
वित्तीय लेनदेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा
जून 2026 में, SVU ने अदालत में एक आरोप पत्र पेश किया, जिसमें रिशु श्री सहित सात व्यक्तियों को मुख्य आरोपित के रूप में चिन्हित किया गया। वर्तमान में, ED की जांच में अधिकारियों के साथ संभावित संपर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है।
इस मामले में 15 अक्टूबर को पटना उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बाद स्थिति और भी तात्कालिक हो गई। अदालत ने रिशु श्री की याचिका पर विचार करते समय यह निष्कर्ष निकाला कि मनी लॉन्ड्रिंग के संदर्भ में रिशु श्री केवल एक साधारण मोहरा प्रतीत होते हैं, न कि मुख्य साजिशकर्ता।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या वास्तविक घोटाले में शामिल महत्वपूर्ण लोग वास्तव में पर्दे के पीछे छिपे हुए हैं। इसके साथ ही, जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भी अदालत ने अपनी चिंता व्यक्त की, यह दर्शाते हुए कि कुछ अधिकारियों को सुरक्षा देने और कुछ को मुश्किल में डालने की संभावनाएं मौजूद हैं।
इसके बाद, ईडी ने अपनी जांच को गति दी। उन्होंने सात IAS अधिकारियों को समन भेजा है। अब इनसे पूछताछ के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि कथित टेंडर सिंडिकेट में उनकी भूमिका क्या है। हालांकि, अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
