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Puri Rath Yatra Tragedy: महाभीड़ के चलते 2 भक्तों ने गंवाई जान, आज दोबारा शुरू होगा रथ खींचने का सिलसिला
Puri Rath Yatra Tragedy: 16 जुलाई (गुरुवार) को ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा के दौरान अचानक बढ़ी भीड़ और लगातार बारिश के कारण एक दुखद घटना हुई, जिसमें दो श्रद्धालुओं की जान चली गई। इसी क्रम में ‘पहंडी’ रस्म में हुई देरी के चलते भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में श्रद्धालुओं को शुक्रवार (17 जुलाई) को एक बार फिर रथ खींचने का अवसर मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि आज तीनों रथों को श्री गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान सात श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इनमें से एक श्रद्धालु, जो 60 साल से अधिक उम्र के थे, की इलाज के दौरान मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि उनकी मौत के कारणों की जांच की जा रही है। इसी तरह एक और घटना में, 35 साल से अधिक उम्र के एक श्रद्धालु को अचानक हृदयाघात आया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
भारी भीड़ और लगातार बारिश के चलते स्वास्थ्य समस्याओं का सामना
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बारिश के कारण जिन श्रद्धालुओं की तबियत खराब हुई थी, उनका इलाज अस्पताल में किया गया। ठीक होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। भारी भीड़ और लगातार बारिश के चलते कई लोगों को थकान, जल की कमी, घुटन और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। फिर भी, राज्य सरकार का कहना है कि रथ यात्रा पूरी तरह से शांति एवं बेहतर व्यवस्थाओं के साथ सम्पन्न हुई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के दौरान कोई भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में विफलता जैसी घटना नहीं हुई।
आधिकारियों के अनुसार, प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, सेवादारों और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों से व्यवस्था को बनाए रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन बिना किसी बड़ी बाधा के चलता रहा। आयोजन के पूरे समय में स्थितियां सामान्य रहीं और सभी आवश्यक सेवाएं कुशलतापूर्वक संचालित होती रहीं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस वर्ष पुरी की वार्षिक रथ यात्रा में लगभग 8 से 9 लाख श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल हुए।
100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
फायर सर्विस के महानिरीक्षक उमाशंकर दाश ने बताया कि रथ यात्रा के दौरान ‘बड़ा डंडा’ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या एकत्रित हो गई थी। इसी मार्ग से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक ले जाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस भीड़ में दम घुटने और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने वाले लगभग 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया। इसके बाद उन्हें अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया, जिससे उन्हें समय पर इलाज मिल सका और उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
प्रशासन के प्रमुख अरबिंद पाढ़ी ने पत्रकारों को बताया कि अनुष्ठानों में कोई रुकावट नहीं हुई है, लेकिन ‘पहंडी’ प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक का समय लग गया। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर लगभग 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिसकी वजह से ‘पहंडी’ में यह देरी आई। पाढ़ी ने बताया कि रथ खींचने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे फिर से शुरू होगी, और देवता रातभर रथों पर रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों देवता शुक्रवार रात को भी रथों पर ही रहेंगे, जबकि गुंडिचा मंदिर में प्रवेश का जुलूस शनिवार को आयोजित किया जाएगा।
