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लोकतंत्र

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है? युवाओं के गुस्से और देश की मौजूदा उथल-पुथल का सच- डॉ…

लोकप्रिय शायर शहरयार की ग़ज़ल की दो पंक्तियां हैं-सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ हैइस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है। सीने

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश | आधुनिक जीवन, प्रकृति और मनुष्य पर गहन विचार

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश: आकाश बादलों से भरा। लगता था कि अब बारिश होगी कि तब बारिश होगी। बारिश के डर से छाता भी रख लिया गया।

जंतर-मंतर पर गांधी जी के सवाल: लोकतंत्र, सत्ता और आज़ादी पर डॉ योगेंद्र का बड़ा लेख

गांधी जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर से बेआबरू होकर निकले थे। रह रह कर नरेंद्र मोदी जी के द्वारा कहे अपशब्द कानों में गूँज रहे थे। वे

मैं तो शहीद हूँ, हर युग में लौट कर आऊँगा’ : छात्र आंदोलन, लोकतंत्र और समाज पर डॉ. योगेन्द्र का…

मैं तो शहीद हूँ, हर युग में लौट कर आऊँगा रांची में सुबह सुबह पनियाया आकाश। टहलने निकला तो लगा कि बारिश होगी ही होगी । हल्की झींसीं आई

डॉ. योगेन्द्र का लेख: ‘पीर पर्वत सी हो गई’—युवा आंदोलन, जंतर-मंतर और सरकार पर तीखा हमला

डॉ. योगेन्द्र डॉ. योगेन्द्र का लेख: 'पीर पर्वत सी हो गई': घर में बैठे- पढ़ते- लिखते मैं बहुत उत्साहित हूँ। जंतर- मंतर पर सरकार के

Youth Protest Indian Politics: सड़कों की हलचल क्या नया गुल खिलाएगी? युवाओं के उभार और बदलती राजनीति…

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों युवाओं की बढ़ती सक्रियता और सड़कों पर दिखाई दे रही हलचल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामाजिक चिंतक

हवा के नये झोंके से कुछ सवाल | डॉ योगेन्द्र

हवा के नये झोंके से कुछ सवाल रांची में हूँ और वह भी कांके के इलाक़े में। गाँव में था तो कांके का नाम सुनता था। जब कोई अतिरिक्त बड़बड़ाता

इन दिनों: रक्त वर्षों से नसों में खौलता है | डॉ योगेन्द्र

आजकल के नेता जितने मुँहफट हैं, उतने तो गाँव के लंपट भी नहीं होते। लगता है कि बदज़ुबानी उनके ख़ून में बस गया है । भोजपुरी फ़िल्मों में